Pebble Stone Walking: कंकड़ों पर चलना एक नहीं बल्कि शरीर को कई प्रकार के हेल्थ बेनिफिट्स पहुंचाता है। आप घर के अंदर या छत में कंकड़ से रास्ता तैयार कर सकते हैं। जानिए पेबल्स स्टोन वॉकिंग के क्या फायदे हैं।
चलना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है और इसके कई प्रकार हैं। रेस वॉकिंग, रेट्रो वॉकिंग की तरह ही पेबल वॉकिंग यानी कंकड़ों पर चलना भी काफी फायदेमंद है। सिद्ध चिकित्सा की एक उपशाखा वर्म विज्ञान है,जिसमें पेबल्स वॉकिंग का जिक्र होता है।
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वर्म पॉइंट्स होते हैं एक्टिवेट
शरीर में मौजूद वर्म पॉइंट्स को एक्टिवेट करने में पेबल्स मदद करता है। तलवों में मौजूद वर्म पॉइंट्स कंकड़ों पर चलने से उत्तेजित होते हैं। इसके लिए आप घर पर 8 के आकार का कंकड़ों वाला पथ बना सकते हैं। इसे घर में कहीं भी, छत पर, बगीचे में या सामने, जहाँ भी आपको सुविधा हो, बनाया जा सकता है। आप नदी किनारे भी जाकर चल सकते हैं।
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पेबल्स वॉकिंग के फायदे
यह डायबिटीज के मरीजों के ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने में मदद करता है। बुजुर्गों के लिए कंकड़ों वाले रास्ते पर रोजाना चलने से ब्लड प्रेशर भी कम होता है।
रोजाना 8 के आकार में चलने से वजन भी नियंत्रित रहता है।
अगर आप इसे घर पर ही बना लेते हैं, तो जब भी समय मिले, चलकर अपने शरीर को मजबूत बना सकते हैं।
यह आंतों की गतिविधि को बेहतर बनाता है और पाचन को बढ़ावा देता है। यह गठिया के रोगों से भी बचाता है।
अपने घर में 8 से 10 फीट लंबी जगह चुनें। उत्तर-दक्षिण दिशा में 8 के आकार का रास्ता बनाना चाहिए। चौड़ाई 6 फीट हो तो बेहतर है। इस रास्ते पर कंकड़ बिछाकर उस पर धीरे-धीरे चलना शुरू करें। अगर पैरों में कोई घाव न हो तो बिना जूते-चप्पल के चलें। 10 मिनट दायीं और 10 मिनट बायीं ओर, इस तरह बदल-बदल कर चलना चाहिए।
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कंकड़ का रास्ता बनाते समय बरतें सावधानी
कुछ लोग 8 के आकार का पथ बहुत छोटा बनाते हैं। ऐसा करने से चक्कर आ सकते हैं।पथ 6 फीट से कम चौड़ा नहीं होना चाहिए। 10 फीट तक का पथ बनाएंगे तो चलने में और भी आराम होगा। अगर आप नये हैं तो धीरे-धीरे चलें। समय के साथ आप तेजी से चल सकते हैं।
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