
हेल्थ डेस्क: मधुमेह यानि डायबिटीज की समस्या से दुनियाभर में करोड़ों लोग जूझ रहे हैं। इस बीमारी में व्यक्ति के शरीर में इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पाता जिससे ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) बढ़ जाता है। अब हाल के अध्ययनों में पता चला है कि टाइप 2 मधुमेह होने के हाई जेनेटिक जोखिम वाले लोग भी एक्टिव रहकर अपने जोखिम को कम कर सकते हैं। जी हां, सिडनी विश्वविद्यालय के नेतृत्व में हुए एक अध्ययन ने ऐसे परिणाम निकलकर सामने आए हैं। इसमें हाई लेवल की शारीरिक गतिविधि का विशेष रूप से टाइप 2 मधुमेह के कम जोखिम के बीच एक मजबूत सहसंबंध की खोज की गई है।
टाइप 2 मधुमेह की रोकथाम ऐसे है संभव
सिडनी विश्वविद्यालय की इस रिसर्च के निष्कर्ष ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित हुए थे। शोधकर्ताओं का कहना है कि अध्ययन दर्शाता है कि हाई लेवल की शारीरिक गतिविधि को टाइप 2 मधुमेह की रोकथाम के लिए एक प्रमुख रणनीति के रूप में बढ़ावा दिया जाना चाहिए। क्योंकि इसने लाखों ऑस्ट्रेलियाई लोगों को प्रभावित किया है। अध्ययन में यूके बायोबैंक के 59,325 अडल्ट शामिल थे, जिन्होंने अध्ययन की शुरुआत में एक्सेलेरोमीटर (कलाई पर पहना जाने वाला ट्रैकर्स) पहना था और फिर स्वास्थ्य परिणामों को ट्रैक करने के लिए सात साल तक उनका पालन किया गया।
यूके बायोबैंक एक बड़े पैमाने पर बायोमेडिकल डेटाबेस और अनुसंधान संसाधन है। जिसमें आधे मिलियन यूके पार्टिसिपेंट्स की अज्ञात आनुवंशिक, जीवन शैली और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी शामिल है। इसी में टाइप 2 डायबिटीज के विकास के हाई जोखिम से जुड़े आनुवंशिक मार्कर शामिल थे। हाई जेनेटिक जोखिम स्कोर वाले लोगों में कम आनुवंशिक जोखिम स्कोर वाले लोगों की तुलना में टाइप 2 मधुमेह विकसित होने का जोखिम 2.4 गुना अधिक था।
हाई फिजिकल एक्टिविटी करेगी डायबिटीज का समाधान
इसी अध्ययन से पता चला है कि प्रति दिन एक घंटे से अधिक हाई इंटेसिटी शारीरिक गतिविधि करने वालों में टाइप 2 मधुमेह के विकास के 74 प्रतिशत कम जोखिम होते हैं। जबकि उनकी तुलना में 5 मिनट से कम शारीरिक गतिविधि करने वाले लोगों में ये रिस्क ज्यादा है। यह अपडेट तब भी समान था जब अन्य आनुवंशिक जोखिम कारकों का हिसाब रखा गया था। एक और बेहतरीन खोज यह थी कि हाई जेनेटिक जोखिम वाले लोग, जो सबसे अधिक शारीरिक रूप से सक्रिय श्रेणी में थे उनको वास्तव में टाइप 2 मधुमेह के विकास का जोखिम कम था। जबकि जिन लोगों में डायबिटीज के कम जेनेटिक जोखिम थे लेकिन वो कम से कम फिजिकल एक्टिव थे इसीलिए उनको बीमारी का खतरा ज्यादा था।
चार्ल्स पर्किन्स सेंटर और फैकल्टी ऑफ मेडिसिन एंड हेल्थ के वरिष्ठ लेखक एसोसिएट प्रोफेसर मेलोडी डिंग कहते हैं कि हालांकि टाइप 2 डायबिटीज की शुरुआत में जेनेटिक और फिजिकल एक्टिविटी की भूमिका अच्छी तरह से स्थापित है। अब तक बहुत कम ही साक्ष्य ऐसे थे कि जिन्हें शारीरिक गतिविधि के बाद भी जेनेटिक जोखिम ज्यादा था।
दुनिया भर में 537 मिलियन लोग हैं मधुमेह से पीड़ित
हम अपने जेनेटिक रिस्क और फैमिली हिस्ट्री को नियंत्रित करने में तो असमर्थ हैं, लेकिन यह खोज आशाजनक और सकारात्मकता प्रदान करती है। क्योंकि एक एक्टिव लाइफस्टाइल के माध्यम से हम टाइप 2 डायबिटीज के अत्यधिक जोखिम से लड़ सकते हैं। यहां शारीरिक गतिविधि का मतलब ऐसी एक्टिविटी से है जिसमें पसीना आए और सांस जल्दी-जल्दी बाहर निकले। जैसे तेज चलना, गार्डनिंग, दौड़ना, एरोबिक डांसिंग, चढ़ाई, साइकिल चलाना। सभी गतिविधियों में आप जल्दी-जल्दी सांस लेते हैं और शरीर एक्टिव बनता है।
आज डायबिटीज एक वैश्विक स्वास्थ्य चिंता है। साल 2021 में दुनिया भर में 537 मिलियन वयस्क मधुमेह के साथ जी रहे थे। लगभग 1.2 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई लोगों को टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित दर्ज किया गया था।
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