
अगर आपने हेल्थ इंश्योरेंस लेते वक्त डायबिटीज के बारे में नहीं बताया है, तो भी कंपनी आपका क्लेम रिजेक्ट नहीं कर सकती। कंज्यूमर कोर्ट ने कहा कि डायबिटीज एक आम लाइफस्टाइल बीमारी है, इसे छिपाना गलत नहीं माना जा सकता। बेंगलुरु के एक कपल ने 76,000 रुपये के क्लेम रिजेक्शन के खिलाफ केस जीता है। बेंगलुरु एडिशनल अर्बन डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन ने ये फैसला सुनाया।
जयनगर के रहने वाले अशोक (65) और उनकी पत्नी सुमा (62) ने प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनी से 10 लाख का फ्लोटर ग्रुप इंश्योरेंस प्लान लिया था। वो रेगुलर प्रीमियम भर रहे थे। 18 जनवरी 2024 से 17 जनवरी 2025 तक का प्रीमियम 52,958 रुपये उन्होंने भरा था। मार्च 2024 में सुमा को आँखों का इलाज करवाना पड़ा। 21 मार्च को 21,000 का इंजेक्शन और 28 मार्च को 55,000 की सर्जरी हुई। कुल 76,000 का क्लेम किया, लेकिन 27 जून को कंपनी ने रिजेक्ट कर दिया।
कंपनी ने कहा कि सुमा को 14 साल से डायबिटीज है, ये बात उन्होंने इंश्योरेंस लेते वक्त नहीं बताई। आँखों की बीमारी डायबिटीज से जुड़ी है। 14 अगस्त 2024 को कपल ने कंज्यूमर कोर्ट में केस किया। कंपनी के वकील कोर्ट में आए, लेकिन जरूरी डॉक्यूमेंट नहीं दिए। डॉक्टर ने बताया कि सुमा की बीमारी उम्र की वजह से भी हो सकती है।
कंपनी ने कहा कि उनकी कोई गलती नहीं है। पॉलिसी एक्टिव है, पैसा लिया गया है, और समय सीमा भी खत्म नहीं हुई है। लेकिन डायबिटीज की जानकारी न देने पर क्लेम रिजेक्ट किया जा सकता है। कोर्ट ने नेशनल कंज्यूमर कोर्ट के एक और फैसले का हवाला देते हुए कंपनी की बात नहीं मानी।
कोर्ट ने कहा कि डायबिटीज जैसी आम बीमारी को छिपाना गलत नहीं है। कंपनी ने गलती की है। कंपनी को 76,000 रुपये क्लेम के साथ 27 जून 2024 से 6% ब्याज भी देना होगा। साथ ही 10,000 रुपये हर्जाना और 10,000 रुपये कोर्ट का खर्चा भी देना होगा।
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