
Microplastic Pollution: माइक्रोप्लास्टिक (Microplastics) पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए एक नया खतरा बनकर उभर रहा है। बोस्टन यूनिवर्सिटी (Boston University) की एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि माइक्रोप्लास्टिक बैक्टीरिया को एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) के प्रति Resistant बना सकता है, जिससे दवाओं का असर कम हो सकता है।
कैसे माइक्रोप्लास्टिक बढ़ा रहा है बैक्टीरिया की ताकत?
अप्लाइड एंड एनवायरनमेंटल माइक्रोबॉयोलॉजी (Applied and Environmental Microbiology) जर्नल में पब्लिश हुई स्टडी के अनुसार, जब बैक्टीरिया माइक्रोप्लास्टिक पार्टिकल्स के संपर्क में आते हैं तो वे इस पर चिपक जाते हैं और एक बॉयोफिल्म बना लेते हैं। यह एक चिपचिपी परत होती है जो बैक्टीरिया को बाहरी हमलों से बचाती है।
बोस्टन यूनिवर्सिटी की रिसर्चर नीला ग्रॉस (Neila Gross) के अनुसार, माइक्रोप्लास्टिक पर बनने वाले Biofilms इतने मजबूत होते हैं कि जब इन पर एंटीबायोटिक्स डाले गए तो दवाएं बैक्टीरिया तक पहुंच ही नहीं पाईं। नीला ग्रॉस ने बताया कि हमने पाया कि माइक्रोप्लास्टिक पर बनने वाले बायोफिल्म्स कांच जैसी अन्य सतहों की तुलना में अधिक मजबूत और मोटे होते हैं। यह देखना चौंकाने वाला था।
प्रोफेसर मुहम्मद ज़मान (Muhammad Zaman) ने बताया कि माइक्रोप्लास्टिक्स खासकर High-Density और Impoverished Areas में Antimicrobial Resistance (AMR) का खतरा बढ़ा सकते हैं, क्योंकि इन जगहों पर प्लास्टिक कचरा अधिक होता है और संक्रमण तेजी से फैलते हैं।
हर साल करीब 4.95 मिलियन मौतें एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (Antibiotic Resistance) से जुड़ी होती हैं।
Gross और Zaman अब यह जांचने की तैयारी कर रहे हैं कि क्या यह प्रभाव केवल लैब में है या असल दुनिया में भी माइक्रोप्लास्टिक से बैक्टीरिया एंटीबायोटिक्स के प्रति अधिक रेजिस्टेंट हो जाते हैं।
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