
Constipation Lifestyle Mistakes: सर्दियों में कब्ज की समस्या आम हो जाती है। ठंड के कारण प्यास कम लगती है, फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है और खानपान भी हैवी हो जाता है। इन्ही सब कारणों के चलते सर्दियों में पेट साफ न होना, गैस, ब्लोटिंग और सुस्ती की दिक्कत बढ़ जाती है। कब्ज होने पर अक्सर लोग तुरंत दवा का सहारा लेते हैं, लेकिन असली समस्या और कब्ज की जड़ लाइफस्टाइल की छोटी-छोटी गलतियां होती हैं। अगर समय रहते आदतें बदल ली जाएं, तो बिना दवा के भी कब्ज से राहत पा सकते हैं, चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
ठंड में प्यास कम लगने से लोग पानी कम पीते हैं। इससे आंतों में मल सूखने लगता है और कब्ज बढ़ता है। सर्दियों में भी दिनभर थोड़ा-थोड़ा करके गुनगुना पानी पीना बहुत जरूरी है। सुबह उठते ही 1-2 गिलास गुनगुना पानी पीने की आदत डालें, इससे डाइजेशन एक्टिव होता है।
सर्दियों में लोग ज्यादा तला-भुना, मैदे और मीठे ज्यादा खाना पसंद करते हैं, इससे शरीर में फाइबर की कमी हो जाती है। हरी सब्जियां, मौसमी फल, सलाद, दलिया और साबुत अनाज न खाने से कब्ज की दिक्कत बढ़ती है। रोज के खाने में फाइबर जरूर ऐड करें ताकि कब्ज की दिक्कत न हो।
ठंड के कारण वॉक और एक्सरसाइज नहीं कर पाते। लंबे समय तक बैठे रहना पाचन को धीमा कर देता है। रोज कम से कम 20-30 मिनट हल्की वॉक, योग या स्ट्रेचिंग जरूरी है। इससे आंतों की मूवमेंट बेहतर होती है और कब्ज में राहत मिलती है।
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सुबह की जल्दबाजी या ठंड के डर से लोग टॉयलेट जाने की इच्छा को रोक लेते हैं। यह आदत धीरे-धीरे क्रोनिक कब्ज में बदल सकती है। रोज एक तय समय पर, खासकर सुबह, बिना मोबाइल के शांति से टॉयलेट जाएं और पेट साफ करें।
सर्दियों में ठंड से राहत पाने के लिए लोग ज्यादा कॉफी और चाय पीने लगते हैं।खाली पेट ज्यादा चाय या कॉफी पीने से शरीर हाइड्रेट होता है और कब्ज बढ़ सकता है। इसकी जगह गुनगुना पानी, हर्बल चाय या सूप पीएं।
कम नींद और ज्यादा स्ट्रेस डाइजेशन पर सीधा असर डालते हैं। पूरी नींद लें और सोने से पहले मोबाइल से दूरी बनाएं। मानसिक शांति से भी कब्ज की समस्या कम होती है।
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