
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार 1 फरवरी को बजट पेश किया। इस बजट में हेल्थ पर खासा ध्यान दिया गया। वित्त मंत्री सीतारमरण ने न केवल आयुर्वेदिक चिकित्सा का ध्यान रखा बल्कि कैंसर और डायबिटीज की दवाओं की इम्पोर्ट ड्यूटी माफ कर सस्ता करने की घोषणा की। बजट में बायोफार्मा शक्ति स्कीम की खास चर्चा रही। इस स्कीम के तहत नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों पर ध्यान दिया गया। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में 'बायोफार्मा शक्ति' स्कीम अनाउंस की। इस स्कीम के तहत 10,000 करोड़ रुपये के बजट से भारत को बायोफार्मा हब बनाने की बात की गई। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में बीमारियों का बोझ नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों, जैसे कि डायबिटीज, कैंसर और ऑटोइम्यून डिसऑर्डर की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में इन बीमारियों के इलाज के लिए दवाओं का सस्ता होना जरूरी है। बायोफार्मा हब में धीमी गति से बढ़ने वाली दवाओं के बारे रिसर्च की जाएगी। इसके साथ ही 3 नेशनल इंस्टीट्यूट भी तैयार किए जाएंगे, तो इस पर काम करेंगे।
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भारत डायबिटीज का घर बन चुका है और देश को सस्ते इलाज की जरूरत है। ICMR-INDIAB के अनुसार, भारत में लगभग 10.1 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। भारत में डायबिटीज के इलाज का 1 साल का औसत सीधा खर्च लगभग ₹15,000 से ₹35,000 के बीच आता है। खर्चे में दवाएं मुख्य रूम से शामिल हैं। कैंसर की दवाओं में 1 साल में लाखों खर्च हो जाते हैं। ऐसे में कैंसर के साथ डायबिटीज की दवाएं सस्ती होने से राहत मिलेगी।
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