
Rare Blood Group: थैलेसीमिया एक जेनेटिक ब्लड डिसऑर्डर है। भारत में हर साल करीब 10 से 15 हजार बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित होते हैं। करीब 50 मिलियन लोग थैलेसीमिया के लक्षण वाहक होते हैं और अपने बच्चों में बीमारी का कारण बनते हैं। थैलेसीमिया से पीड़ित व्यक्ति को ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है। शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं नहीं बन पाती हैं जिसके कारण थैलेसीमिया से पीड़ित व्यक्ति के समय-समय पर ब्लड की जरूरत पड़ती है। कई बार बच्चों को रेयर ब्लड ग्रुप की भी जरूरत पड़ती है। आइए जानते हैं रेयर ब्लड कौन से होते हैं और क्यों रेयर ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों को ब्लड डोनेशन करना चाहिए।
इस ब्लड ग्रुप को इंडिया में रेयर माना जाता है। अगर आपका ब्लड ग्रुप AB नेगेटिव है तो आप रक्त दान कर किसी जरूरतमंद की जान बचा सकते हैं। आपको बताते चले कि कुल आबादी के केवल 1% लोगों में AB नेगेटिव पाया जाता है।
AB- जितना B नेगेटिव रेयर नहीं है। फिर भी यह ब्लड ग्रुप अपेक्षाकृत असामान्य ही माना जाता है। ये भी आबादी का लगभग 1% पाया जाता है।
B- के जैसे ही A- भी एक अपेक्षाकृत रेयर ब्लड ग्रुप है, जिसका प्रतिशत B- के समान ही है। आप डॉक्टर से जांच कराने के बाद ब्लड ग्रुप की पहचान कर सकते हैं।साथ ही समय-समय पर स्वस्थ्य व्यक्ति ब्लड डोनेट कर थैलेसीमिया जैस समस्या झेल रहे लोगों की मदद भी कर सकते हैं।
इस रक्त समूह को भी रेयर माना जाता है, कम ही लोगों को AB पॉजिटिव के बारे में जानकारी होती है। ये ब्लड ग्रुप आबादी के केवल 4% लोगों में पाया जाता है। बच्चे के ब्लड ग्रुप का निर्धारण माता-पिता से होता है। माता-पिता के अगर 4 बच्चे है तो ये बिल्कुल जरूरी नहीं है कि सभी का ब्लड ग्रुप एक जैसा हो।
यह एक बहुत ही दुर्लभ फेनोटाइप है, जो इंडिया में 10,000 लोगों में से 1 में पाया जाता है। इसकी विशेषता H एंटीजन की न होना है।बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को कभी अगर रक्त की जरूरत पड़ती है तो ये केवल बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति से ही ले सकते हैं।
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