
अगर आपने इस सीजन में मिर्च के पौधे लगाए हैं, तो जून का महीना उनकी अच्छी ग्रोथ और ज्यादा फल पाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। चाहे आपके पौधे अभी-अभी लगाए गए हों या फिर थोड़े बड़े हो चुके हों, इस समय की गई सही देखभाल पूरे सीजन की पैदावार को इफेक्टिव बना सकती है। मिर्च के पौधे ज्यादा नखरे नहीं करते। इन्हें अच्छी धूप, उपजाऊ मिट्टी और पर्याप्त पानी मिल जाए तो ये तेजी से बढ़ते हैं और खूब फल देते हैं। आइए जानते हैं जून में मिर्च के पौधों के लिए जरूरी 5 काम, जिन्हें अपनाकर आप शानदार हार्वेस्ट पा सकते हैं।
जून में टेम्प्रेचर तेजी से बढ़ने लगता है और गर्म हवाएं मिट्टी की नमी को जल्दी खत्म कर देती हैं। ऐसे में मिर्च के पौधों को नियमित पानी देना सबसे जरूरी काम है। नए लगाए गए पौधों की मिट्टी हमेशा हल्की नम रहनी चाहिए, लेकिन पानी का जमाव बिल्कुल नहीं होना चाहिए। सप्ताह में 2 से 3 बार गहराई तक सिंचाई करें ताकि जड़ें मिट्टी के अंदर तक विकसित हो सकें। मजबूत और गहरी जड़ें पौधों को सूखे का सामना करने में मदद करती हैं। बड़े पौधों को भी हर सप्ताह लगभग 1 से 2 इंच पानी की आवश्यकता होती है। कोशिश करें कि पानी सीधे जड़ों तक पहुंचे, इससे पौधे स्वस्थ बने रहते हैं।
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मिर्च एक ऐसी सब्जी है जिसे भरपूर धूप पसंद होती है। अगर पौधों को पर्याप्त धूप नहीं मिलेगी तो वे लंबे और कमजोर हो जाएंगे तथा फल कम आएंगे। मिर्च के पौधों को प्रतिदिन कम से कम 6 घंटे सीधी धूप मिलनी चाहिए। हालांकि 8 से 12 घंटे की धूप मिलने पर पौधे और भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं। सुबह की धूप विशेष रूप से फायदेमंद होती है, जबकि दोपहर की बहुत तेज धूप से कुछ हद तक बचाव भी जरूरी है। यदि किसी पेड़ या अन्य पौधे की छाया मिर्च के पौधों पर पड़ रही हो तो उसे हटाने या पौधे को अधिक धूप वाली जगह पर शिफ्ट करें।
जून का मौसम सिर्फ पौधों को ही नहीं बल्कि कई तरह के कीटों को भी पसंद आता है। एफिड्स (चेपा), कैटरपिलर और अन्य रस चूसने वाले कीट इस समय तेजी से हमला कर सकते हैं। हर सप्ताह कम से कम दो बार पौधों की जांच करें। खासकर पत्तियों के नीचे देखें, क्योंकि अधिकांश कीट वहीं छिपे रहते हैं। अगर पत्तियां मुड़ने लगें, पीली दिखें या उन पर चिपचिपा पदार्थ नजर आए तो यह कीटों का संकेत हो सकता है। नीम ऑयल स्प्रे का यूज करके अधिकांश सामान्य कीटों को नियंत्रित किया जा सकता है। शुरुआती अवस्था में कीटों की पहचान कर लेना बाद में होने वाले बड़े नुकसान से बचा सकता है।
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यह काम कई गार्डनर्स को पसंद नहीं आता, लेकिन मिर्च के पौधों के लिए यह काफी फायदेमंद माना जाता है। जब पौधा अभी छोटा हो और उस पर शुरुआती फूल आने लगें, तो उन्हें हल्के हाथों से तोड़ देना चाहिए। ऐसा करने से पौधे की ऊर्जा फल बनाने की बजाय जड़ों और पत्तियों को मजबूत बनाने में लगती है। मजबूत पौधे बाद में ज्यादा संख्या में और बेहतर गुणवत्ता वाली मिर्च पैदा करते हैं। इसलिए शुरुआती कुछ फूल हटाने से लंबे समय में प्रोडक्शन बढ़ सकता है।
मल्चिंग यानी पौधों के आसपास मिट्टी को किसी जैविक सामग्री से ढक देना। यह एक आसान लेकिन बेहद असरदार टैक्निक है। सूखी घास, पत्तियां, भूसा या नारियल की भूसी जैसी नैचुरल सामग्री का यूज मल्च के रूप में किया जा सकता है। इससे मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है, खरपतवार कम उगते हैं और जड़ों को ज्यादा गर्मी से सेफ्टी मिलती है। इसके अलावा बारिश के दौरान मिट्टी के छींटों से फैलने वाली कई बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।