
Hacks to Revive Balcony Plants: अगर आपके बालकनी गार्डन के पौधे बार-बार मुरझा रहे हैं, पत्तियां पीली हो रही हैं या पौधा बढ़ ही नहीं रहा, तो इसका सबसे बड़ा कारण मिट्टी की गुणवत्ता हो सकती है। गमलों की मिट्टी समय के साथ सख्त हो जाती है, उसमें पोषक तत्व कम हो जाते हैं और पौधों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन व नमी नहीं मिल पाती। ऐसे में पौधे धीरे-धीरे कमजोर होकर मरने लगते हैं। लेकिन अगर आप मिट्टी में कुछ खास चीजें मिला दें, तो पौधों में नई जान आ सकती है। यहां हम बता रहे हैं 5 ऐसी चीजें, जिन्हें बालकनी गार्डन की मिट्टी में डालने से पौधे हरे-भरे और ताजे बने रहेंगे।
वर्मी-कम्पोस्ट यानी केंचुआ खाद, पौधों के लिए एक तरह का सुपरफूड है। यह मिट्टी को ढीला बनाता है, उसमें सूक्ष्म पोषक तत्व भरता है और पानी की होल्डिंग क्षमता बढ़ाता है। हर 15–20 दिन में 2-3 मुट्ठी वर्मी-कम्पोस्ट गमले की ऊपरी मिट्टी में मिलाएं।
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बोन मील पौधों के लिए फॉस्फोरस का बेहतरीन सोर्स है, जो जड़ों को मजबूत बनाता है और फूलों व फलों की संख्या बढ़ाता है। इसे खासकर फ्लावरिंग और फ्रूटिंग प्लांट्स में इस्तेमाल करें। महीने में एक बार 1-2 चम्मच बोन मील मिट्टी में मिलाकर पानी दें।
नीम खली मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीटाणुओं और फंगस को खत्म करने में मदद करती है। यह पौधों को रूट रॉट और एफिड्स जैसी बीमारियों से बचाती है। हर महीने 2–3 चम्मच नीम खली डालकर मिट्टी को हल्का ढीला कर दें।
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आपके किचन में निकलने वाला जैविक कचरा (सब्जियों के छिलके, चाय की पत्ती, फल के छिलके) पौधों के लिए बेहतरीन खाद बन सकता है। इसे अच्छी तरह सड़ा-गलाकर मिट्टी में मिलाएं, इससे पौधों को नाइट्रोजन, पोटैशियम और अन्य मिनरल्स मिलेंगे।
अगर गमले की मिट्टी बहुत सख्त हो गई है और पानी रिसता नहीं, तो मिट्टी में नदी की रेत और कोकोपीट मिलाएं। रेत पानी की ड्रेनेज सुधारती है और कोकोपीट नमी बनाए रखती है। यह खासकर गर्मियों में पौधों के लिए बेहद जरूरी है।
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