
गुलाब सिर्फ एक फूल नहीं, बल्कि प्यार, सुंदरता और प्रकृति की कोमलता का प्रतीक है। हर माली का सपना होता है कि उनके बगीचे में हर मौसम में रंग-बिरंगे गुलाब खिले रहें। हालांकि, गुलाब के पौधे को बीज से उगाना मुश्किल और समय लेने वाला हो सकता है, लेकिन कटिंग से गुलाब उगाना न केवल आसान है बल्कि इसका रिजल्ट भी जल्दी और भरोसेमंद होता है। अगर आप भी चाहते हैं कि बिना महंगे पौधे खरीदे अपने बगीचे में गुलाब खिलाएं, तो यह आसान और कारगर तरीका आपके लिए है। आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे सिर्फ कटिंग से आप अपने बगीचे को गुलाब से घर सकते हैं।
कटिंग से गुलाब उगाने के लिए सबसे पहले टाइम पीरियड का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। सबसे अच्छा समय मानसून या हल्के ठंड के शुरुआती महीने (जुलाई से नवंबर) का होता है। इस दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी होती है और पौधों की ग्रोथ भी तेज होती है।
एक हेल्दी और बिना फूल वाली टहनी को 45 डिग्री के एंगल पर काटें। ध्यान रखें कटिंग 6-8 इंच लंबी होनी चाहिए और उस पर कम से कम 3-4 नोड्स (गांठ) होने चाहिए।नीचे के पत्तों को हटा दें, और ऊपर के 1-2 पत्ते ही छोड़ें ताकि गुलाब का पौधा सांस ले सके। अगर है तो कटिंग के निचले सिरे को रूटिंग हार्मोन पाउडर में डुबो लें, इससे जड़ें जल्दी निकलती हैं।
एक छोटा गमला लें जिसमें ड्रेनेज होल्स हों। गमले में हल्की, भुरभुरी और पानी को रोककर न रखने वाली मिट्टी डालें। आप मिट्टी में कोकोपीट, रेत और खाद का मिश्रण भी डाल सकते हैं।
गुलाब कटिंग को मिट्टी में 2-3 इंच गहराई तक दबाएं। कटिंग को धीरे से दबाकर मिट्टी को सेट करें ताकि वो हिले नहीं। अब गमले को किसी छायादार और हवादार जगह रखें, ताकि सीधी धूप उसपर नहीं पड़े।
कटिंग की नमी बनाए रखने के लिए उस पर एक ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक बोतल का कट हिस्सा या पॉलीथिन कवर करें। इससे मिनी ग्रीनहाउस जैसा इफ़ेक्ट बनेगा, और कटिंग सूखेगी नहीं। हर दिन हल्के पानी का छिड़काव करें, लेकिन पानी ज्यादा न हो।
पौधा लगाने के बाद तुरंत ही ग्रो नहीं करेगा। इसमें 2 से 4 हफ्तों में जड़ें निकलती हैं। जब आप हल्के से खींचने पर कटिंग को मिट्टी से जुड़ा हुआ महसूस करें, तो समझिए पौधा जड़ पकड़ चुका है। अब आप इसे बड़े गमले में ट्रांसप्लांट कर सकते हैं और धूप में धीरे-धीरे एक्सपोज करें।
गुलाब को सीधी धूप बहुत पसंद है, इसलिए 4-6 घंटे की धूप जरूरी है। हर 15-20 दिन में जैविक खाद डालें (जैसे गोबर खाद या वर्मीकम्पोस्ट)। पौधे को पानी तभी दें जब मिट्टी सूखी हो। समय-समय पर सूखे या पीले पत्तों को हटा दें।
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