
1947 में रियासतों के विलय और 1971 में राजसी विशेषाधिकार खत्म होने के बाद भी, भारत के राजघराने अपनी विरासत को संजोए रखे हैं और आधुनिक समाज में अपनी एक खास पहचान बनाए हुए हैं। ये परिवार अपने महलों को आलीशान होटलों में बदल रहे हैं, दान-पुण्य कर रहे हैं, पारंपरिक रस्मों को निभा रहे हैं और अपने शाही ठाठ-बाट को ज़िंदा रखे हुए हैं। कौन हैं ये राजघराने?
उदयपुर का मेवाड़ राजवंश, राजपूतों की शान और बहादुरी की निशानी है। राणा श्रीजी अरविंद सिंह मेवाड़, उदयपुर के सिटी पैलेस से एक बड़े बिज़नेस साम्राज्य को संभालते हैं, जहाँ हज़ारों टूरिस्ट आते हैं। 1576 के हल्दीघाटी युद्ध में मुग़लों के खिलाफ महाराणा प्रताप की वीरता की कहानियाँ आज भी मशहूर हैं।
महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के ज़रिए शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान दिया जा रहा है। HRH ग्रुप ऑफ़ होटेल्स, शिव निवास पैलेस, फतेह प्रकाश पैलेस जैसी प्रॉपर्टीज़ के मालिक इस राजघराने को भारत सरकार से ‘हेरिटेज ग्रैंड’ का दर्जा भी मिला है।
अलसीसर परिवार, खेतड़ी रियासत से जुड़ा है, जो कभी खनिज संपदा से भरपूर थी। अभिमन्यु सिंह ने शेखावाटी के अलसीसर महल और रणथंभौर के नाहरगढ़ किले जैसी प्रॉपर्टीज़ को शानदार टूरिस्ट डेस्टिनेशन में बदल दिया है, जो राजसी ज़िंदगी की झलक दिखाते हैं।
अलसीसर महल में होने वाला मैग्नेटिक फील्ड्स फेस्टिवल, म्यूजिक और आर्ट का एक अनोखा संगम है, जो इस इलाके की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखता है। आप इसका मजा लेना चाहते हैं तो राजस्थान जाएं।
राजकोट का जडेजा परिवार, पीढ़ियों से इस इलाके की राजनीति और समाज में अहम भूमिका निभाता आया है। युवराज मंधातासिंह जडेजा इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। रिन्यूएबल एनर्जी, बायोफ्यूल और हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स में उनकी गहरी रुचि है। स्थानीय कारीगरों को सपोर्ट करके और कच्छी हस्तकला को बढ़ावा देकर, वे पारंपरिक कलाओं को बचाने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मज़बूत कर रहे हैं।
जयपुर का राजघराना, कला, संस्कृति और वास्तुकला के लिए जाना जाता है। युवा राजकुमार पद्मनाभ सिंह इस विरासत को एक नए अंदाज़ में पेश कर रहे हैं। एक बेहतरीन पोलो प्लेयर होने के साथ-साथ वे इंटरनेशनल फैशन ब्रांड्स के लिए रैंप वॉक भी करते हैं।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल को सपोर्ट करने के अलावा, वे ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण में भी योगदान दे रहे हैं। जयपुर की शाही रौनक आज भी दुनिया भर के लोगों को अपनी ओर खींचती है। राजस्थान की डिप्टी सीएम और राजकुमारी दीया कुमारी भी जयपुर राजघराने की बेटी हैं। जयपुर राजघराना राजस्थान में अच्छी पकड़ रखता है।
मैसूर का ओडेयार राजवंश अपनी सांस्कृतिक विरासत को बखूबी निभा रहा है। यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा ओडेयार, सालाना मैसूर दशहरा उत्सव के ज़रिए कलाओं को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसमें इस इलाके के संगीत, नृत्य और लोक कलाओं की झलक देखने को मिलती है।
मैसूर पैलेस, टूरिस्टों के लिए एक खास आकर्षण का केंद्र है। शिक्षा और वन्यजीव संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी यह परिवार सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है।
मारवाड़ इलाके में जोधपुर का राठौर परिवार सदियों से अपनी धाक जमाए हुए है। उम्मेद भवन पैलेस, दुनिया के सबसे बड़े प्राइवेट रेजिडेंस में से एक है। गज सिंह II के नेतृत्व में, इस परिवार ने राजस्थान इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल और वर्ल्ड सेक्रेड स्पिरिट फेस्टिवल जैसे आयोजनों को सफलतापूर्वक आयोजित किया है। मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के ज़रिए मारवाड़ की समृद्ध विरासत को संजोया जा रहा है।
बड़ौदा का गायकवाड़ परिवार अपने प्रगतिशील शासन और कलाओं के संरक्षण के लिए जाना जाता है। समरजीतसिंह गायकवाड़, बड़ौदा म्यूजियम और पिक्चर गैलरी में कला और ऐतिहासिक कलाकृतियों का एक अनोखा संग्रह संजोए हुए हैं।
बकिंघम पैलेस से चार गुना बड़ा लक्ष्मी विलास पैलेस, उनके बीते ज़माने की शानो-शौकत की कहानी कहता है। महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी को सपोर्ट करके वे शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। गुजरात भर में यह परिवार दान-पुण्य के कामों में लगा हुआ है।
तिरवनंतपुरम का राजघराना, केरल की सांस्कृतिक पहचान का एक अहम हिस्सा है। 18वीं सदी की शुरुआत से ही इसका इतिहास रहा है। पद्मनाभस्वामी मंदिर के संरक्षक होने के नाते, इस परिवार के पास सोने और कीमती रत्नों का अपार खज़ाना है।
इसके मुखिया मूलम तिरुनाल राम वर्मा, श्री चित्रा तिरुनाल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के ज़रिए शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। सालाना नवरात्रि उत्सव में शास्त्रीय संगीत और नृत्य के कार्यक्रम आयोजित करके वे इस इलाके की कलात्मक परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।
बीकानेर का राजघराना, राजकुमारी राज्यश्री कुमारी के नेतृत्व में, एक अनोखे सैन्य इतिहास का वाहक है। उनके पूर्वज महाराजा गंगा सिंह ने दोनों विश्व युद्धों में अहम भूमिका निभाई थी।
आज, महाराजा गंगा सिंहजी चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल के क्षेत्र में काम किया जा रहा है। लालगढ़ महल, अब एक हेरिटेज होटल है, जो राजसी मेहमाननवाज़ी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है।
पटौदी परिवार, बॉलीवुड और क्रिकेट में अपने योगदान के लिए मशहूर है। इस परिवार का इतिहास पटौदी रियासत से जुड़ा है। पहले नवाब फैज़ तलाब खान ने 1804 में दूसरे एंग्लो-मराठा युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का साथ दिया था और पटौदी के पहले नवाब बने थे।
उनके पूर्वज इफ्तिखार अली खान पटौदी और मंसूर अली खान पटौदी, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रह चुके हैं। आज सैफ अली खान, बॉलीवुड के एक जाने-माने अभिनेता हैं। लगभग 800 करोड़ रुपये कीमत वाला पटौदी पैलेस, राजसी ठाठ-बाट की एक खास निशानी है।
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