
खराब वॉटरप्रूफ के साथ ही पाइपलाइन में लीकेज या धूप और वेंटिलेशन में कमी के कारण घरो में सीलन आ जाती है। जिन कमरों में हवा और धूप का पर्याप्त इंतजाम नहीं होता है, वहां सीलन लंबे समय तक बनी रहती है। ऐसे स्थानों में न सिर्फ लोगों का स्वास्थ्य खराब होता है बल्कि वहां रखे फर्नीचर भी बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं। अगर आपके घर में भी सीलन की समस्या है, तो आपको महंगे फर्नीचर लेने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं कि सीलन या नमी वाले घरों में किस तरीके के फर्नीचर अवॉइड करने चाहिए।
प्लाईवुड और पार्टिकल बोर्ड नमी को जल्दी सो लेते हैं। अगर आप इनसे किचन या लिविंग रूम फर्नीचर बनवाते हैं, तो यह धीरे-धीरे इनकी मजबूती भी कम होने लगती है। इसलिए आपको प्लाईवुड या पार्टिकल बोर्ड के फर्नीचर बनवाने से बचना चाहिए।
सीलन वाले घर में फफूंदी और दीमक जल्दी लगते हैं इसलिए लकड़ी के फर्नीचर की लाइफ कम हो जाती है। आपको बिना ट्रीटमेंट के साधारण लकड़ी के फर्नीचर रखने से बचना चाहिए। अगर शीशम या अन्य लकड़ी के फर्नीचर मंगवाएं हैं, तो पेंट या पॉलिश से पहले वुड सीलर लगवाएं। साथ ही वार्निश या PU कोटिंग करवाएं। एंटी-फंगल स्प्रे भी फर्नीचर में डाल सकते हैं।
अगर आपके घर में सीलन या नमी ज्यादा रहती है, तो आपको फैब्रिक या कपड़े वाले सोफा और कुर्सियों से भी बचना चाहिए। कपड़े से बने सोफा और कुर्सियां नमी को अपने अंदर रोक लेते हैं, इसके कारण ऐसे फर्नीचर से जल्दी बदबू भी आने लगती है। साथ ही फंगस लगने का खतरा भी बढ़ जाता है।
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लेदर के फर्नीचर काफी महंगे आते हैं और उनकी देखरेख अधिक करनी पड़ती है। अगर आप सीलन वाले घर में लेदर या चमड़े से बने फर्नीचर रखती हैं, तो इसमे फफूंद का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही इनका लुक भी खराब हो सकता है। इसलिए आपको चमड़े से बने फर्नीचर अवॉइड करने चाहिए।
नोट: सीलन वाले घरों के लिए मेटल फर्नीचर, वाटर-रेसिस्टेंट प्लास्टिक फर्नीचर या अच्छी तरह ट्रीट की गई सॉलिड लकड़ी के फर्नीचर इस्तेमाल करना बेहतर रहता है।
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