
गणेश चतुर्थी का त्योहार भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ-साथ बच्चों को भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं के बारे में जानकारी देने का भी अच्छा मौका है। इस गणेश चतुर्थी आप बच्चों को गणपति जी से जुड़ी छोटी-छोटी कहानियां सुना सकते हैं। चाहे तो इन कहानियों की किताबे बच्चों को लाकर दें या फिर स्क्रीन में दिखाएं। जानते हैं गणपति जी से जुड़ी 5 रोचक कहानियां के बारे में।
एक बार भगवान शिव और माता पार्वती ने गणेश जी और उनके भाई कार्तिकेय के सामने एक प्रतियोगिता रखी। उन्होंने कहा कि जो सबसे पहले पूरी दुनिया की परिक्रमा करके वापस आएगा, वही विजेता होगा।
कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर पूरी दुनिया की यात्रा पर निकल गए। लेकिन गणेश जी ने अपने माता-पिता यानी शिव-पार्वती की तीन परिक्रमा की और कहा कि उनके लिए माता-पिता ही पूरी दुनिया हैं।गणेश जी की बुद्धिमानी देखकर माता-पिता बहुत प्रसन्न हुए और उन्हें विजेता घोषित किया।
सीख: इस कहानी से बच्चों को माता-पिता के सम्मान और बुद्धि से समस्या का समाधान करने की सीख मिलती है।
भगवान गणेश को एकदंत भी कहा जाता है, यानी एक दांत वाले। पौराणिक कथा के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने जब महाभारत की रचना सुनानी शुरू की, तो उसे लिखने के लिए गणेश जी को लेखक बनाया गया।
गणेश जी ने शर्त रखी कि वे बिना रुके पूरी कथा लिखेंगे। कथा लिखते समय उनकी लेखनी टूट गई। गणेश जी ने बिना काम रोके अपना एक दांत तोड़कर उसे लेखनी के रूप में इस्तेमाल किया और महाभारत लिखना जारी रखा।
सीख: बच्चों को इस कहानी से लक्ष्य के प्रति समर्पण, धैर्य और कठिन परिस्थिति में रास्ता निकालने की प्रेरणा मिलती है।
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एक कथा के अनुसार एक बार गणेश जी बहुत सारे मोदक खाकर अपने वाहन मूषक पर सवार होकर जा रहे थे। रास्ते में उनका वाहन लड़खड़ा गया और गणेश जी गिर पड़े। यह देखकर चंद्रमा हंस पड़े।
गणेश जी को चंद्रमा का इस तरह हंसना अच्छा नहीं लगा। कथा के अनुसार उन्होंने चंद्रमा को अपने रूप और सुंदरता पर घमंड न करने का संदेश दिया। बाद में चंद्रमा ने अपनी गलती स्वीकार की और गणेश जी से क्षमा मांगी।
सीख: बच्चों को इससे किसी के रूप, शरीर या कमजोरी का मजाक न उड़ाने और घमंड से दूर रहने की सीख दी जा सकती है।
भगवान गणेश का वाहन मूषक यानी चूहा है। इससे जुड़ी पौराणिक कथा में बताया जाता है कि एक शक्तिशाली मूषक अपने बल और चंचलता से सभी को परेशान करता था। गणेश जी ने उसे नियंत्रित किया और बाद में उसे अपना वाहन बना लिया।
इस कहानी को बच्चों के सामने इस तरह समझाया जा सकता है कि गणेश जी ने अपनी बुद्धि और शक्ति से एक समस्या को नियंत्रित किया और उसे अपने सहयोगी में बदल दिया।
सीख: बच्चों को इससे अपनी ऊर्जा को सही दिशा में इस्तेमाल करने और मुश्किल परिस्थितियों को समझदारी से संभालने की प्रेरणा मिलती है।
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