
भारत के शाही इतिहास में कई महारानियां अपने फैशन और शानो-शौकत के लिए जानी जाती हैं, लेकिन कूचबिहार की महारानी इंदिरा देवी का अंदाज सबसे अलग था। वह सिर्फ गहने नहीं पहनती थीं, बल्कि उनके जूते भी हीरे, मोती, माणिक और पन्नों से सजे होते थे। 1930 के दशक में उन्होंने इटली के मशहूर शूमेकर सल्वातोरे फेरागामो से 100 से ज्यादा खास जूतों का कलेक्शन तैयार कराया था।
महारानी इंदिरा देवी के लिए बनाए गए जूतों में शाही परिवार की ओर से दिए गए कीमती रत्न लगाए जाते थे। उनके जूते सिर्फ फुटवियर नहीं बल्कि कला का शानदार नमूना माने जाते थे। 1938 में तैयार की गई ब्लैक वेलवेट वेज हील्स आज भी सबसे चर्चित डिजाइनों में गिनी जाती हैं, जिन पर मोती, हीरे और रंग-बिरंगे रत्न जड़े गए थे।
सल्वातोरे फेरागामो महारानी के स्टाइल से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने उनके पैरों के आकार के लकड़ी के सांचे तैयार किए, ताकि हर जूता बिल्कुल सही फिटिंग के साथ बनाया जा सके। आज भी ये लकड़ी के फुट मोल्ड्स और कई दुर्लभ जूते इटली के फ्लोरेंस स्थित म्यूजियो सल्वातोरे फेरागामो में सुरक्षित रखे गए हैं।
1892 में बड़ौदा की राजकुमारी इंदिरा राजे के रूप में जन्मीं इंदिरा देवी ने अपने परिवार की इच्छा के खिलाफ कूचबिहार के महाराजा जितेंद्र नारायण से विवाह किया था। वह अपने समय से कहीं आगे की सोच रखने वाली महिला थीं और भारतीय शाही महिलाओं के बीच शिफॉन साड़ियों को लोकप्रिय बनाने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।
महारानी इंदिरा देवी की फैशन विरासत उनकी बेटी महारानी गायत्री देवी तक पहुंची, जिन्हें दुनिया की सबसे खूबसूरत और स्टाइलिश महिलाओं में गिना जाता है। हालांकि वैश्विक फैशन जगत में अपनी अलग पहचान इंदिरा देवी ने उनसे कई दशक पहले ही बना ली थी।
आज, 90 साल से अधिक समय बाद भी महारानी इंदिरा देवी का फेरागामो जूता संग्रह दुनिया के सबसे अनोखे शाही फैशन कलेक्शनों में गिना जाता है। यह कहानी बताती है कि भारतीय राजघरानों का प्रभाव वैश्विक लग्जरी फैशन पर कितना गहरा रहा है।
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