
अगर इस गर्मी आप भी पुराने मटके का इस्तेमाल करना चाहते हैं लेकिन इस बात से डर रहे हैं कि पानी ठंडा नहीं होगा? तो आपको कुछ सिंपल टिप्स अपनाने चाहिए। मटका पानी को ठंडा रखता है क्योंकि वाष्पीकरण (Evaporation) की प्रक्रिया होती है। जब मटके की दीवारों से हल्का सा पानी बाहर आता है और हवा के संपर्क में सूखता है, तो अंदर का पानी ठंडा होने लगता है। लेकिन मटका पुराना होने पर इसके छिद्र बंद हो जाते हैं और पानी बाहर नहीं आ पाता। इसी कारण से पुराने मटके में पानी ठंडा नहीं होता। आइए जानते हैं कि कौन सा सिंपल टिप्स अपनाकर पुराने मटके में पानी ठंडा किया जा सकता है।
पुराने मटके को निकाल रहे हैं, तो सबसे पहले उसे 6 से 8 घंटे तक ठंडे पानी में भिगोकर रख दें। ऐसा करने से मटके की कूलिंग कैपेसिटी बढ़ जाती है और मटके में मजबूती भी आती है।
चूंकि पुराने मटके का इस्तेमाल लगातार हुआ है, इस कारण से मटके के अंदर और बाहर गंदगी या परत जम जाती है। इस परत को हटाने के लिए आप नमक या बेकिंग सोडा से रगड़कर मटके को साफ कर सकते हैं। सफाई से मटके के छिद्र खुल जाएंगे और वाष्पीकरण की प्रक्रिया भी आसानी से होगी और पानी ठंडा होना शुरू हो जाएगा।
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अगर मटके को सही स्थान पर नहीं रखेंगे, तो पानी ठंडा नहीं होगा। मटके को ऐसी जगह पर रखें, जहां पर हवा आती जाती रहे। ऐसा करने से वष्पीकरण की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे कि पानी ज्यादा ठंडा होता है। कुछ लोग मटके को सीधा धूप में रख देते हैं लेकिन यह बिल्कुल गलत है। ऐसा करने से मटके का पानी गर्म हो सकता है।
मटके के कूलिंग इफेक्ट को बढ़ाने के लिए उसके ऊपर से सूती गीला कपड़ा जरूर लपेट दें। ऐसा करने से मटके का कूलिंग इफेक्ट बढ़ जाता है और 1 साल पुराने मटके में भी ठंडा पानी मिलता है।
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