
ट्रैवल डेस्क। भारत में पहाड़ से लेकर बीच तक स्थित है। यहां पर भीड़भाड़ वाली जगहों से लेकर शांति भरे प्लेस भी हैं। जहां आबादी बिल्कुल कम हैं। अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो क्राउडेड प्लेस पर कोजी फील करते हैं तो अब बिल्कुल भी टेंशन मत लीजिए। दरअसल, आज हम आपको भारत की उन 5 शांत गांव के बारे में बताएंगे। जो अपनी सादगी और अनोखे ट्रेडिशन्स को लेकर मशहूर है। यहां पर खूबसूरती और नेचुरल ब्यूटी का अनोखा संगम देख सकते हैं।
लिस्ट में पहले नंबर हिमाचल प्रदेश का शांशा गांव का नाम है। यहां पर रहने वाले की संख्य 1000 से भी कम है। इस गां में केवल 320 घर हैं। जिनमें 72 पक्के माकान है। बाकि लोग कच्चे घरों में रहना पसंद करते हैं। इस गांव से केलॉन्ग से केवल 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहीं, समुद्र तल से इस गांव की दूर दस हजार फीट है। अगर आप यहां आना चाहते हैं मनाली से बस पकड़ सकते हैं। यहां से मनाली की दूरी 120 किलोमीटर है।
लेह-लद्दाख ट्रिप हर कोई जाना जाता है। आप भी उन लोगों में से हैं तो लेह एक्सप्लोर करना चाहते हैं। यहां आने पर 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित कंजी गांव जाना न भूलें। ये गांव कंजी नदी के किनारे स्थित है। यह गांव चारों ओर विशाल पहाड़ों से घिरा हुआ है। अगर आप ट्रैकिंग पसंद करते हैं तो यहां जरूर आयें। कारगिल से इस गांव की दूरी मात्र 56 किलोमीटर है।
नेचुरल ब्यूटी में नॉर्थ इंडिया को यूरोपियन कंट्री भी मात नहीं दे पाते हैं। अगर आप लाइफ से ब्रेक लेकर घूमना चाहते हैं तो नागालैंड आ सकते हैं। यहां स्थित निटोई गांव बहुत सुंदर है। इस गांव में केवल 400 लोग रहते हैं। बर्फ से ढके पहाड़, हरियाली, ऊंचे-नीचे रास्ते इस गांव को खूबसूरत बनाते हैं। राजधानी कोहिमा से ये गांव मात्र 250 किलोमीटर दूर है।
दुनिया का सबसे गांव हिमाचल प्रदेश के स्पीति में स्थित है। जिसका नाम किब्बर है। समुद्र तल से इस गांव की ऊंचाई 14500 फीट है। इस गांव में केवल 80 घर हैं। जो हिमाचली शैली से बने हुए हैं। यहां पर पहाड़ी ट्रेडिशन का मजा उठा सकते हैं। इस गांव में गोम्पा मठ भी स्थित है। मनाली से ये गांव 188 किलोमीटर दूर है।
नुब्रा घाटी स्थित वारिसफिस्तान गांव सबसे कम आबादी वाले गांवों में से एक है, जहां केवल 258 लोग रहते हैं। यह गांव पहाड़ों के बीच स्थित है। यहां से हिमालय रेंज के अद्भुत नजारें दिखते हैं। जिसे देख आप शायद बिल्कुल भी यकीन नहीं कर पायेंगे। हालांकि दिसंबर से फरवरी तक ये गांव भारी बर्फबारी के कारण अन्य हिस्सों से कटा रहता है। लेह से इस गांव की दूरी 147 किलोमीटर है।
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