
नया फर्नीचर घर के वाइब को चेंज कर देता है। यह सिर्फ डेकोरेशन का हिस्सा नहीं होता है, बल्कि एनर्जी और एटमॉस्फियर भी प्रभावित होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, फर्नीचर की दिशा, रंग, आकार और सामग्री का सीधा असर परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। ऐसे में नया फर्नीचर खरीदने या घर में रखने से पहले कुछ महत्वपूर्ण वास्तु नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानते हैं 5 अहम वास्तु टिप्स।
फर्नीचर का रंग घर के वातावरण और मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है। वास्तु के अनुसार क्रीम, हल्का भूरा, बेज या प्राकृतिक लकड़ी के रंग वाले फर्नीचर अधिक शुभ माने जाते हैं। बहुत ज्यादा गहरे या काले रंग के फर्नीचर से बचना चाहिए। साथ ही फर्नीचर की पॉलिश साफ और चमकदार होनी चाहिए, क्योंकि टूटी-फूटी या फीकी पॉलिश नकारात्मकता को बढ़ा सकती है।
वास्तु शास्त्र में फर्नीचर बनाने के लिए सागौन (टीक), शीशम, नीम और अशोक जैसी लकड़ियों को शुभ माना गया है। ये लकड़ियां मजबूती के साथ सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक मानी जाती हैं। अच्छी गुणवत्ता वाली लकड़ी घर में स्थिरता और सुख-समृद्धि लाने में सहायक मानी जाती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार भारी फर्नीचर जैसे सोफा, अलमारी, बेड या डाइनिंग सेट को घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है। वहीं उत्तर और पूर्व दिशा को जितना संभव हो खुला और हल्का रखना चाहिए। इससे घर में पॉजिटिव एनर्जी का संचार होता है।
फर्नीचर खरीदते समय उसके आकार पर भी ध्यान दें। वास्तु शास्त्र के अनुसार चौकोर (Square) और आयताकार (Rectangular) आकार के फर्नीचर सबसे शुभ माने जाते हैं। बहुत ज्यादा टेढ़े-मेढ़े, नुकीले किनारों वाले या अनियमित आकार के फर्नीचर घर में तनाव और असंतुलन का कारण बन सकते हैं।
इसे भी पढ़ें: गुलाब सी खिलेगी टीनएज बिटियां, 5 नई डिजाइन की पिंक झुमकी में दिखेगी सादगी+पर्सनैलिटी
अगर आप नया फर्नीचर बनवा रहे हैं, तो कोशिश करें कि उसमें नई और मजबूत लकड़ी का ही उपयोग हो। बहुत पुराने या खराब हो चुके फर्नीचर की लकड़ी का दोबारा इस्तेमाल करने से बचें। वास्तु मान्यताओं के अनुसार नया फर्नीचर नई ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक होता है।
और पढ़ें: बाथरूम के लिए देखें 7 मॉडर्न मिरर, लगते ही बदल देंगे बाथरूम लुक