
Relationship Tips In Hindi: महिला ही प्यार को निभाती हैं, घर को संभालने में संघर्ष करती है। वो जब किसी को चाहती है तो टूट कर चाहती है, ऐसी लाइन अक्सर आपने सुनी होगी। हम सबको लगता भी है कि महिला ही प्यार को निभाने और बचाने के लिए त्याग करती हैं। पुरुष की तो कोई बात ही नहीं करता है। जबकि एक रिश्ते को निभाने के लिए पुरुष भी उतनी ही मेहनत करते हैं जितनी महिला। राइटर और एक्टर अविनाश द्विवेदी की कहानी ये बताती है कि कैसे उन्होंने अपने प्यार को पाने के लिए लंबा इंतजार किया और आज तक हर मुश्किल वक्त में अपनी पत्नी के साथ खड़े हैं।
5 साल का इंतजार और उम्र की दीवार
ककुदा फिल्म के राइटर और एक्टर अविनाश ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने संभावना सेठ के लिए 5 साल तक इंतजार किया। उम्र में 7 साल बड़ी होने के बावजूद, उन्होंने कभी इस रिश्ते को लेकर हिचक नहीं दिखाई। वह मानते हैं कि जब दिल सच्चा हो तो उम्र या समाज की सोच मायने नहीं रखती।
संभावना से प्यार और शादी का फैसला
वो बताते हैं कि उनकी मुलाकात संभावना से एक रियलिटी शो के दौरान हुई थी। धीरे-धीरे दोस्ती गहरी हुई। शो को जीतने के बाद मैंने संभावना को प्रपोज कर दिया। तब संभावना एक बड़ी स्टार थीं। उन्होंने मुझे कहा कि अभी तुम नए नए इंडस्ट्री में आए हो। अभी से इन सब चीजों में पड़ोगे तो आगे नहीं बढ़ पाओगे। संभावना को लगा कि अभी वो मुझे टाल देगी तो मुझ पर चढ़ा प्यार का बुखार उतर जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मैं भले ही उस वक्त खामोश रह गया, लेकिन उनके लिए मेरा प्यार कम नहीं हुआ।
इंतजार लंबा फिर बनी बात
मैंने पूरी शिद्दत से संभावना से प्यार किया। 5 साल तक उसके हां कहने का इंतजार किया। आखिरकार उसने भी हामी भर दी। अविनाश कहते हैं कि उन्हें संभावना की ईमानदारी, आत्मविश्वास और जिंदगी के प्रति जुझारूपन बेहद पसंद आया। वो बताते हैं कि संभावना बिल्कुल फेक नहीं है जो बातें उसके मन होती है वहीं जुबान पर रहती है।
ब्रेकअप से भी गुजरा हमारा इश्क
अविनाश बताते हैं कि ऐसा नहीं हुआ कि हम लड़ते-झगड़ते नहीं थे। हम कई बार झगड़ते थे और रूठ जाते थे। बात करना भी बंद हो जाता था। वो बताते हैं कि जब भी पैच होता तो वो मेरी वजह से होता था। मैं ही उसे मनाता था। लेकिन साल 2015 में हमारा बहुत बड़ा झगड़ा हुआ और हमने तय किया कि हम कभी नहीं मिलेंगे। उस वक्त मुझे लगा कि संभावना अब कभी नहीं आएगी मेरे पास। लेकिन दिल से मजबूर मैं उसे वीडियो कॉल करता और वो फोन उठा लेती। लेकिन हम एक दूसरे से बात नहीं करते थे। सिर्फ एकटक देखते थे। धीरे-धीरे हम दोनों को एहसास हुआ कि हम एक दूसरे के बगैर नहीं रह पाएंगे। फिर हमने तय किया कि शादी कर लेंगे।
घरवालों को मनाने में भी लगा वक्त
अविनाश बताते हैं कि मैं तब एक स्ट्रग्लर था और संभावना बड़ी स्टार बन चुकी थीं। मेरे घरवाले भी पहले तो बड़ी उम्र की लड़की से शादी करने के लिए नहीं मानें। लेकिन बाद में मनाने पर राजी हो गए। संभावना के पैरेंट्स तो बिल्कुल इसके खिलाफ थे। मुझे याद है कि मैंने जब संभावना के पापा को कॉल किया था तो उन्होंने कहा था कि ये तो हो नहीं सकता भूल जाओ। बावजूद इसके मैं नहीं मना और अपनी फैमिली को लेकर संभावना के घर गया। वहां भी बात नहीं बनी। जिसके बाद संभावना ने अपने पैरेंट्स को कहा कि शादी मुझसे ही करेगी।
मां को मनाने में लगा वक्त
14 जुलाई 2016 को शादी हमने की, हालांकि इस दौरान भी संभावना की पूरी फैमिली राजी नहीं थी। मम्मी उसकी मेहंदी की रस्म में नहीं आई थीं। तब सब लोग वहां गए और उनकी मां को मनाकर लाएं। इसके बाद हमारी शादी हुई। हालांकि मुझे इस दौरान डिप्रेशन भी हो गया था। लेकिन सबसे निकलकर हमने नई जिंदगी शुरू की। हम साथ है और एक दूसरे का सपोर्ट सिस्टम है।
प्रेरणा है ये रिश्ता
अविनाश और संभावना की कहानी सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं, बल्कि एक ऐसा रिश्ता है जिसमें प्यार, धैर्य, त्याग और समझदारी की गहराई है। यह कहानी उन सभी के लिए जो ये सोचते हैं कि पुरुष रिश्ता बचाने के लिए कुछ नहीं करते हैं।
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