
Premanand Ji Maharaj Marriage Advice: सातों जन्म मैं तुम्हे करता रहूंगा प्यार...गाने के ये बोल आज के दौर में बस बोल बनकर रह गए हैं। रिश्ते इतने कमजोर हो गए हैं कि एक झटका लगता नहीं टूट जाते हैं। पति-पत्नी का रिश्ता भी इसमें आता है। तलाक के दर लगातार बढ़ रहे हैं। सवाल है कि आखिर क्यों सबसे पवित्र माने जाने वाले इस बंधन में अपवित्रता आ गई है। क्यों जेन जी (Gen Z) कपल अपनी गृहस्थी को संभाल नहीं पा रहे हैं। इसी विषय पर वृंदावन के प्रेमानंद जी महाराज ने एक गहरी और सोलने वाली बात कही है।
प्रेमानंद जी से पूछा गया कि आखिर शादी क्यों नहीं टिक रही है, तो उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जिसे बार-बार होटल के खाने की आदत लग जाती है, उसे घर का सादा खाना अच्छा नहीं लगता। ठीक उसी तरह, जो व्यक्ति बार-बार रिश्ते बदलता है, उसके अंदर किसी एक इंसान के प्रति स्थिरता और समर्पण का भाव कम हो जाता है।
उनके अनुसार, चाहे लड़का हो या लड़की, अगर बार-बार प्रेम और ब्रेकअप करता है, तो वो कैसे शादी के बंधन में टिक सकता है। वो किसी एक प्रति समर्पित हो ही नहीं सकता है। ऐसे लोग अक्सर तुलना करने लगते हैं, कभी किसी में कुछ अच्छा लगता है, तो कभी किसी और में। यह आदत शादी जैसे गंभीर रिश्ते के लिए सही नहीं मानी जाती।
शादी सिर्फ प्यार का नाम नहीं है, बल्कि यह एक जिम्मेदारी और समर्पण का रिश्ता होता है। इसमें उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन एक मजबूत रिश्ता वही होता है जिसमें दोनों पार्टनर एक-दूसरे के प्रति पूरी तरह समर्पित रहें। प्रेमानंद जी का कहना है कि जो लोग अपने मन को स्थिर नहीं कर पाते और बार-बार रिश्ते बदलते हैं, उनके लिए शादी में टिके रहना मुश्किल हो सकता है। क्योंकि शादी में सबसे जरूरी चीज होती है, एक व्यक्ति को पूरी तरह अपनाना और उसके साथ हर परिस्थिति में खड़े रहना।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हर कोई बदल नहीं सकता। अगर कोई व्यक्ति अपने व्यवहार को समझकर खुद में सुधार लाए और रिश्तों को गंभीरता से लेने लगे, तो वह एक अच्छा जीवनसाथी बन सकता है। आखिरकार, एक सफल शादी का आधार केवल प्यार नहीं, बल्कि भरोसा, धैर्य और सबसे बढ़कर समर्पण होता है।
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