सेक्स तो सेक्स होता है फिर जेन Z वाले 'ग्रीन सेक्स' में क्या नया आ गया?

Published : Feb 09, 2026, 11:14 AM IST
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सार

जेन Z 'ग्रीन सेक्स' का ट्रेंड चला रहे हैं, जिसका मकसद सेक्सुअल लाइफ में कार्बन फुटप्रिंट कम करना है। इसके लिए वे बायोडिग्रेडेबल कंडोम, रिचार्जेबल टॉयज और ऑर्गेनिक लुब्रिकेंट्स जैसे पर्यावरण-अनुकूल प्रोडक्ट्स अपना रहे हैं।

जेन Z को लेकर एक ही समय में तारीफ, डर और चिंता, सब कुछ महसूस किया जा रहा है। आजकल उनके बनाए नए-नए ट्रेंड्स सोशल मीडिया पर खूब धूम मचा रहे हैं। फिलहाल, जो ट्रेंड सबसे ज्यादा फेमस हो रहा है, वो है 'ग्रीन सेक्स'। अब आप ये मत पूछिएगा कि सेक्स तो सेक्स होता है, उसमें भी क्या कोई कलर या फ्लेवर होता है? हमेशा कुछ नया चाहने वालों के लिए ये कोई नई बात भी नहीं है। इसकी एक खास वजह है। जो लोग जेन Z को कई वजहों से भला-बुरा कहते हैं, वे भी उनके इस ट्रेंड को थोड़ी तारीफ की नजर से देख रहे हैं। असल में, यह 'ग्रीन सेक्स' काफी दिलचस्प है। सेहत के लिए भी अच्छा होने की वजह से जेन Z के इस ट्रेंड को उनकी पिछली पीढ़ी, यानी मिलेनियल्स और कुछ हद तक जेन X भी फॉलो कर रहे हैं। साथ ही, वे ग्रीन सेक्स के बारे में पॉजिटिव बातें भी करने लगे हैं। इसी वजह से यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच रहा है।

क्या है यह ग्रीन सेक्स?

आसान शब्दों में कहें तो, सेक्सुअल लाइफ में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स का पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे असर को कम करना ही 'ग्रीन सेक्स' है। क्लाइमेट चेंज को लेकर बेहद जागरूक जेन-Z के युवा अपनी रोमांटिक लाइफ में भी कार्बन फुटप्रिंट कम करना चाहते हैं। इसी के चलते वे सेक्स में भी पर्यावरण के अनुकूल तरीकों को अपना रहे हैं।

पर्यावरण-अनुकूल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल

पारंपरिक कंडोम में प्लास्टिक और जानवरों से मिलने वाले पदार्थ हो सकते हैं। इसका विरोध करते हुए युवा अब बायोडिग्रेडेबल कंडोम का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये ऐसे प्रोडक्ट्स हैं जो पर्यावरण में आसानी से घुल जाते हैं और वीगन (Vegan) लेटेक्स से बने होते हैं। इसके अलावा, बैटरी से चलने वाले प्लास्टिक सेक्स टॉयज की जगह, वे रिचार्जेबल या पर्यावरण-अनुकूल चीजों से बने डिवाइसेज को पसंद कर रहे हैं। केमिकल-फ्री और ऑर्गेनिक चीजों से बने लुब्रिकेंट्स का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।

सोच-समझकर डेटिंग

जेन-Z के लिए सस्टेनेबिलिटी यानी टिकाऊपन, आकर्षण का एक हिस्सा बन गया है। डेटिंग ऐप्स पर भी पर्यावरण से प्यार करने वालों को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। महंगे तोहफे या प्लास्टिक का इस्तेमाल करने वाले होटलों के बजाय, पार्कों में घूमना या पौधे लगाने जैसी इको-फ्रेंडली डेट्स पॉपुलर हो रही हैं।

नैतिक ब्रांड्स को सपोर्ट

आज के युवा सिर्फ मुनाफे के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली कंपनियों के प्रोडक्ट्स को नकार रहे हैं। वे उन ब्रांड्स को सपोर्ट कर रहे हैं जो अपने कर्मचारियों को सही सैलरी देते हैं और जिनकी उत्पादन प्रक्रिया पारदर्शी होती है। यह ट्रेंड जेन-Z के युवाओं की उद्देश्यपूर्ण यानी मीनिंगफुल लाइफ को दिखाता है। उन्हें इस बात का एहसास है कि उनके हर काम का धरती पर क्या असर पड़ता है। इस पीढ़ी को यह बात अच्छी तरह समझ आ गई है कि सेक्सुअल हेल्थ के साथ-साथ धरती की सेहत का ख्याल रखना भी आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

वे जो कंडोम इस्तेमाल करते हैं, उनमें जानवरों से मिलने वाला प्रोटीन (केसीन) नहीं होता और ये प्राकृतिक रूप से मिट्टी में घुल जाते हैं। एक बार इस्तेमाल करके फेंकने वाली सेक्स टॉय की बैटरी के बजाय USB से चार्ज होने वाले सिलिकॉन डिवाइस का इस्तेमाल करना एक पर्यावरण-अनुकूल आदत है। वे एलोवेरा या पानी पर आधारित, पेट्रोकेमिकल-फ्री प्रोडक्ट्स को लुब्रिकेंट के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। सिर्फ सेक्स ही नहीं, बल्कि मेंस्ट्रुअल कप या पीरियड पैंटी का इस्तेमाल भी प्लास्टिक कचरे को काफी कम करता है। वे बेडरूम की बेडशीट को लेकर भी जागरूक हैं और कॉटन की बेडशीट ही इस्तेमाल करते हैं।

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