
रिलेशनशिप डेस्क। जैसे ही बच्चा थोड़ा बड़ा होने लगता है,मां-बाप बोलना, लिखना और यहां तक कविताएं याद कराते हैं लेकिन कई बार ऐसा होता है। बच्चा इन सब चीजों में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं दिखाता और पेरेंट्स् परेशान हो जाते हैं। इतना ही नहीं मां-बाप ट्यूशन भेजने लगते हैं ताकि वह कुछ सीख सके। लेकिन उम्र से पहले बच्चों के ऊपर पढ़ाई लिखाई का प्रेशर डालना ठीक नहीं है। अगर प्ले स्कूल में अन्य बच्चे लिख रहे हैं आपका नहीं तो परेशान होने की बजाय उसे क्रिएटिव तरह से सिखाएं। आज हम आपके लिए कुछ आसान ट्रिक्स लेकर आये हैं। जिन्हें फॉलो कर आप खुद बच्चे को लिखना सिखा सकती हैं।
उम्र के हिसाब से बच्चे के ऊपर पढ़ने की प्रेशर बिल्कुल न डालें। बैग कहा, स्कूल में तुम लिखते नहीं हो। तुम्हारा ऐसा है। इन सब चीजों को करने से बचे। इसकी बजाय बच्चे को पढ़ाने के लिए आप क्रिएटिव तरीका अपना सकती हैं। उन्हें खेलने के लिए कलर दें दें। इसके अलावा किसी कागज में कुछ लिखकर आप ऊपर से ट्रेस पेपर लगा दें और बच्चे से लाइन खींचने के लिए बोले। अगर वह ऐसा करते हैं तो उन्हें गिफ्ट दें। इससे भला बच्चा लिखना न सीखे लेकिन उसकी कलाई और उंगलियों से चीजें पकड़ने की ग्रिप मजबूत होगी।
इसके अलावा आप बैंगल्स या फिर चूड़ियों की मदद से लेटर्स बना सकती हैं। इससे बच्चों को पढ़ाएं। फिर वही चीज बच्चे से कराएं। ऐसे में बच्चा न तो बोर होगा और ही वह पढ़ने से भागेगा। आप हर रोज इन चीजों को कर उन्हें धीरे-धीरे लिखाना सिखा सकती हैं।
घर के बजट से लेकर छोटी-मोटी चीजें लिखने के लिए आप डायरी का इस्तेमाल करती होंगी। आप बच्चे के सामने बैठकर चीजें लिख सकती हैं ताकि उसकी दिलचस्पी बढ़े और आप उसे भी अपने साथ लिखाने की कोशिश करें।
लिखने की कला दबाव से नहीं आयेगी। आप इसे दिलचस्प बना सकती हैं। इसके लिए स्लेट, चॉक बोर्ड या फिर व्हाइट बोर्ड का इस्तेमाल करें। पढ़ाई हमेशा बैठकर नहीं की जाती है। आप काम करते वक्त भी बच्चे को लिखना सिखा सकती हैं। जैसे किचन में रोटी बना रही हैं, उन्हें अपने साथ बैठा लें। आप बच्चों का नाम या फिर कोई भी नाम की रोटी बना दें। ये सब चीजें देखकर बच्चा अट्रेक्ट होता है।
अगर इसके बाद भी बच्चा नहीं सीख रहा है तो आप टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकती है। जैसे कोई माइंड गेम। स्टेज 1-2 के नाम से। आप उन्हें खुद का गेम ढूंढने के लिए कहें। ऐसा करने से धीरे-धीरे वह चीजें याद करेगा।
ये भी चीजें इतनी आसान नहीं है। बच्चे को पढ़ाना या फिर लिखाना चाहती हैं तो धैर्य रखना बेहद जरूरी है। बच्चे को चिल्लाएं नहीं और किसी से भी उनकी बुराई न करें। चाहे वह पिता हो या फिर दोस्त। हमेशा बच्चे की स्किल्स की तारीफ करें। ऐसा करने से बच्चा मोटिवेट होता है।
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