
Relationship Story: अगर शादी में एक ऐसा मोड़ आता है, जब लगता है कि पार्टनर के अंदर उसके लिए फिलिंग बची नहीं है। एक रुमेट की तरह दोनों रहने लगते हैं। ये कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहां एक महिला ने अपना दर्द शेयर किया है। रेडिट पर उसने बताया कि कैसे प्रेग्नेंसी के बाद से पति के साथ रिश्ता पूरी तरह बदल गया है। तो चलिए बताते हैं महिला का दर्द..जिससे बहुत लोग इत्तेफाक रखते हैं।
30 साल की महिला ने लिखा कि हमउम्र पति के साथ इस समय रिश्ता बुरे दौर से गुजर रहा है। हम पिछले 8 साल से साथ हैं और एक साल पहले हमारी शादी हुई। हमारी एक बेटी है, जो अब करीब 17 महीने की है। लेकिन सच्चाई यह है कि पिछले करीब दो सालों में (प्रेग्नेंसी से लेकर अब तक) हमारे बीच सिर्फ एक बार शारीरिक संबंध बना है।
मैंने कई बार उनसे खुलकर बात की। उन्हें बताया कि मुझे कैसा महसूस होता है, मैं चाहती हूं कि चीजें बदलें, बस थोड़ी-सी कोशिश और अपनापन चाहिए। लेकिन दो साल में कुछ भी नहीं बदला। अब बात यहां तक पहुंच गई है कि मैं अंदर से टूटने लगी हूं और हाल ही में मैं खुद पर काबू नहीं रख पाई और उन पर फूट पड़ी।
मसला सिर्फ फिजिकल दूरी का नहीं है। जब मेरी बेटी का जन्म हुआ, वह समय से पहले (33.5 हफ्ते) पैदा हुई थी और दो हफ्ते NICU में रही। मुझे गंभीर प्रीक्लेम्प्सिया हुआ था, इसलिए मैं नहीं चाहती थी कि कोई मिलने आए। इसके बावजूद मेरे ससुराल वाले जबरदस्ती NICU में घुस गए। बाद में जब मैंने फैसला लिया कि NICU में सिर्फ मैं और मेरे पति ही बेटी से मिलेंगे, जिससे उसका डॉक्टर भी सहमत था, तो मेरे ससुर ने मुझे “मैनिपुलेटिव” कहा।
मेरे पति ने यह बात मुझे बाद में बताई। अब मुझे पता चला है कि वे मुझे “vindictive” भी कहते हैं और यह आरोप लगाते हैं कि मैं उन्हें उनकी पोती से दूर रख रही हूं, जबकि वे बिना बताए हमारे घर आ जाते हैं और फिर जल्दी जाने को कहे जाने पर बुरा मानते हैं।
जब मैंने अपने पति से कहा कि उन्हें मेरा और हमारी बेटी का साथ देना चाहिए, तो उनका जवाब था कि तुम्हें और मेरे माता-पिता को आपस में बात करनी चाहिए। वो इस मामले में कुछ नहीं बोलेगा।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब उन्होंने मेरा साथ नहीं दिया। सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब मेरे पिता का निधन हुआ। उस दिन वह मेरे पास तुरंत नहीं आए। वह अगले दिन आए, वो भी अपने बेस्ट फ्रेंड के साथ टेनिस खेलने के बाद। उनका बहाना था कि वह “इस सच्चाई को मानना नहीं चाहते थे।”
इन सबके साथ-साथ, सालों से इंटिमेसी की पूरी कमी और यह एहसास कि हम बस रूममेट की तरह साथ रहकर बच्चे की परवरिश कर रहे हैं। मुझे लगने लगा है कि शायद इस शादी को अब बचाया नहीं जा सकता। मैं एक मैरिटल इश्यूज़ स्पेशलाइज़्ड काउंसलर के पास जा रही हूं और मैंने उन्हें भी यह बात बता दी है। लेकिन ऐसा लगता है कि मेरी हर बात दीवार से टकराकर वापस आ जाती है। मैं समझती हूं कि बच्चे के बाद नजदीकियां मुश्किल हो जाती हैं, खासकर जब चाइल्डकेयर का सहारा न हो। लेकिन मुझे नहीं लगता कि हालात इतने बुरे होने चाहिए।
मुझे पता है कि मैं भी पहल कर सकती हूं। मैंने कोशिश भी की। फ्लर्टी और इशारों वाले मैसेज भेजे। लेकिन जवाब में सिर्फ हा हा हा इमोजी में मिला, जैसे मेरी भावनाएं मजाक हों। मैं सिर्फ शारीरिक संबंध नहीं, बल्कि यह महसूस करना चाहती हूं कि मेरा पति मुझे चाहता है। उनका तर्क यह भी था कि वह पैसे कमाने और हमें आर्थिक रूप से संभालने पर फोकस कर रहे हैं, क्योंकि मैं अभी नर्सिंग ब्रिज प्रोग्राम पूरा कर रही हूं। मैं उनकी बात समझती हूं, लेकिन अगर शादी ही नहीं बचेगी, तो ये सब किस काम का?
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कुल मिलाकर, मुझे नहीं पता कि यह रिश्ता अब बच भी सकता है या नहीं। क्या यह शादी सुधर सकती है, या फिर यह बस धीरे-धीरे खत्म होने की ओर बढ़ रही है?
लोगों का मानना है कि महिला जिस स्थिति से गुजर रही है, वह मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद भारी है। ट्रॉमेटिक डिलीवरी, दो साल से शारीरिक संबंध न होना और ससुराल से सपोर्ट न मिलना,इन सबके बीच उसका थक जाना स्वाभाविक है।कई यूजर्स ने साफ कहा कि शादी तभी चल सकती है, जब दोनों पार्टनर जिम्मेदारी लें, एक-दूसरे के लिए खड़े हों और रिश्ते में प्रयास करें। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि महिला की अपेक्षाएं गलत नहीं हैं, क्योंकि शारीरिक और भावनात्मक जुड़ाव शादी की बुनियाद होता है।वहीं, कुछ यूजर्स ने काउंसलिंग का इंतजार करने और अंतिम फैसला लेने से पहले अपनी भावनाओं को साफ तौर पर समझने की सलाह दी।
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