दूल्हे की दुल्हन के घर विदाई, मेघालय में शादी का उल्टा चलन

Published : Jun 09, 2025, 11:53 AM IST
dulha dulhan

सार

Meghalaya Unique Indian marriage traditions: मेघालय में शादी के बाद लड़की नहीं, लड़के की विदाई होती है! जानिए इस अनोखे रिवाज के बारे में जहां दूल्हा ससुराल में बस जाता है और परिवार की बागडोर महिलाओं के हाथों में होती है।

भारत एक ऐसा देश है जहां हर 100-200 किलोमीटर पर भाषा, पहनावा, खाना और यहां तक कि रिश्तों को निभाने के तरीके भी बदल जाते हैं। शादी जैसे भावनात्मक और सामाजिक संस्थान को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में अनगिनत रिवाज और परंपराएं हैं। आमतौर पर जब भी हम किसी शादी की बात करते हैं, तो हमारी आंखों के सामने एक ही दुल्हन की विदाई, सजी-धजी कार, पीछे रोते माता-पिता और नई जिंदगी की ओर बढ़ती लड़की का सीन आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसी भी जगह है जहां यह परंपरा पूरी तरह उलटी है? जी हां, हम बात कर रहे हैं मेघालय की, एक खूबसूरत पहाड़ी राज्य जो सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी मातृसत्तात्मक (matrilineal) सामाजिक व्यवस्था के लिए भी जाना जाता है। यहां की कुछ जनजातियों में शादी के बाद लड़की नहीं बल्कि लड़के की विदाई होती है, और वह दूल्हा हमेशा के लिए अपनी ससुराल में आकर बस जाता है।

क्या है मेघालय का यह अनोखा विवाह रिवाज? 

भारत के ज़्यादातर हिस्सों में दुल्हन की विदाई एक भावनात्मक और पारंपरिक रस्म होती है, वहीं मेघालय में दूल्हे की विदाई होती है। मेघालय की खासी, जयंतिया और गरो जनजातियों में मातृसत्तात्मक व्यवस्था (Matrilineal System) प्रचलित है। इसका मतलब है कि परिवार की जड़ें मां से जुड़ी होती हैं नाम, संपत्ति, घर और विरासत सब मां की ओर से चलते हैं। शादी के बाद लड़का-लड़की के घर आकर बसता है, वहीं उसका नया जीवन शुरू होता है।

  • लड़का, लड़की के घर स्थायी रूप से रहने आ जाता है
  • सास-ससुर ही अब उसका परिवार बन जाते हैं
  • वह अपनी ससुराल में बच्चों की परवरिश करता है
  • उसकी अगली पीढ़ी भी उसी घर और परिवार में पलती है
  • यहाँ तक कि यदि लड़की के घर में संपत्ति है, तो वही बच्चों को मिलती है — लड़के का कोई दावा नहीं होता।

किस जनजाति में है यह रिवाज? 

  1. खासी (Khasi) – सबसे प्रमुख मातृसत्तात्मक जनजाति
  2. जयंतिया (Jaintia) – खासी से जुड़ी जनजाति, वही परंपराएं
  3. गरो (Garo) – यहां भी महिला ही प्रमुख होती है

इन जनजातियों में खास बात ये है कि छोटी बेटी (Youngest Daughter) को पारिवारिक संपत्ति मिलती है, और वही अपने माता-पिता की देखभाल करती है। इस कारण शादी के बाद उसका पति उसी घर में आकर बसता है।

क्या होते हैं इसके सामाजिक असर? 

1. महिलाओं की ताकतवर स्थिति: लड़कियां आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होती हैं। उन्हें विवाह के बाद घर छोड़ने की जरूरत नहीं होती है और परिवार की धुरी महिलाएं होती हैं।

2. पुरुषों की अलग पहचान : पुरुषों को अपना नाम और पहचान पत्नी के परिवार में ढालनी पड़ती है। कुछ मामलों में यह उन्हें असहज भी महसूस कराता है। कई पुरुष ऐसे समाज में खुद की पहचान बनाने के लिए संघर्ष करते हैं।

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