90s Love Vs Modern Love: अनन्या पांडे ने आज के प्यार और लिव-इन रिलेशनशिप को क्यों कहा ‘पॉपकॉर्न लव’?

Published : Feb 01, 2026, 03:20 PM IST
RELATIONSHIP ON ANANYA PANDAY

सार

'Popcorn Love' vs. 90s Love: आज की दुनिया में रिश्ते जल्दी बनते हैं और उतनी ही आसानी से टूट भी जाते हैं। अनन्या पांडे ने मॉडर्न लव को "पॉपकॉर्न लव" बताया, जिससे कमिटमेंट की कमी पर सवाल उठे।

Ananya Panday Relationship Statement: बदलते समय के साथ, रिश्तों को लेकर सोच और उम्मीदें भी बदल गई हैं। आज, प्यार पहले जैसा स्थिर और धैर्य वाला नहीं रहा। कमिटमेंट का डर, जल्दी बोर होना, और "बेहतर ऑप्शन" की तलाश ने रिश्तों को कमजोर बना दिया है। हाल ही में, एक्ट्रेस अनन्या पांडे ने द कपिल शर्मा शो में मॉडर्न रिश्तों पर खुलकर बात की, जिससे यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है।

'पॉपकॉर्न लव' बनाम 90 के दशक का प्यार

अनन्या पांडे ने आज के प्यार की तुलना पॉपकॉर्न से की। उन्होंने कहा कि 90 के दशक में प्यार एक इंश्योरेंस पॉलिसी जैसा था - एक बार कमिटमेंट हो गया, तो उसे जिंदगी भर निभाने का इरादा होता था। लेकिन आज, थोड़ी सी भी परेशानी होने पर लोग पॉपकॉर्न की तरह फूट जाते हैं और रिश्ता खत्म कर देते हैं।

लिव-इन रिलेशनशिप को कमिटमेंट समझना

एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि आजकल लोग लिव-इन रिलेशनशिप और खर्च शेयर करने को ही कमिटमेंट समझते हैं। सच तो यह है कि रूममेट्स भी ऐसा ही करते हैं। उनके अनुसार, इमोशनल जिम्मेदारी और साथ रहने का इरादा ही असली कमिटमेंट है, सिर्फ साथ रहना नहीं।

छोटी-छोटी बातों पर टूटते रिश्ते

आजकल रिश्ते फोन पासवर्ड शेयर न करने, देर से जवाब देने या छोटी-मोटी अनबन जैसी बातों पर टूट रहे हैं। अनन्या के अनुसार, यही वजह है कि लॉयल्टी कम हो रही है। लोगों को रिश्तों को समझने और उन्हें संभालने के बजाय रिश्ते बदलना ज्यादा आसान लगता है।

डिजिटल युग और ज्यादा ऑप्शन का कन्फ्यूजन

आकाश हेल्थकेयर के साइकियाट्रिस्ट डॉ. पवित्र शंकर का मानना ​​है कि डेटिंग ऐप्स और सोशल मीडिया ने कमिटमेंट के कॉन्सेप्ट को बदल दिया है। जब इतने सारे ऑप्शन मौजूद होते हैं, तो लोग एक रिश्ते में सेटल होने से डरते हैं। हमेशा एक बेहतर ऑप्शन छूट जाने का डर बना रहता है।

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क्या आज भी सच्चा कमिटमेंट मौजूद है?

डॉ. शंकर के अनुसार, कमिटमेंट आज भी मौजूद है, लेकिन अब यह लोगों की शर्तों और सुविधा पर आधारित है। पहले, रिश्तों को परमानेंट माना जाता था, अब वे सब्सक्रिप्शन जैसे हो गए हैं। सच्चा कमिटमेंट वह है जो मुश्किल समय में भी साथ रहने की कोशिश करता है।

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