पिता ने कहा NO, मां ने देखा मौका: क्या बच्चों को सोशल मीडिया स्टार बनाना सही है?

Published : Jun 25, 2025, 07:53 AM IST
 kids to have social media

सार

Kids And Social Media:आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया सिर्फ एक माध्यम नहीं, बल्कि कमाई और फेमस होने का जरिया बन चुका है। कई पैरेंट्स अपने बच्चों की क्यूटनेस और मासूमियत को दिखाकर ‘फैमिली व्लॉगर्स’ बन जाते हैं। लेकिन क्या यह बच्चों के लिए सही है? 

Kids To Have Social Media Good Or Bad: मैंने 17 साल की उम्र में पिता बनाकर बच्चों को कैमरे के सामने नहीं बल्कि जिंदगी सुरक्षित रखने का सपना देखा था। रेडिट पर एक 24 साल के पिता ने अपनी कहानी शेयर की, जिसने बहुत से लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। क्या बच्चे को कम उम्र में सोशल मीडिया स्टार बनाना चाहिए। क्या हम उनकी मासूमियत को छिन रहे हैं?

सोशल मीडिया साइट पर अपनी कहानी शेयर करते हुए शख्स ने लिखा,'उसके जुड़वा बच्चे (एक लड़का और एक लड़की) अभी केवल 7 साल के हैं। वह और उसकी गर्लफ्रेंड 17 साल की उम्र से एक साथ हैं और उन्होंने मुश्किलों में भी अपने बच्चों के लिए एक स्थिर जीवन तैयार किया है।लेकिन हाल ही में उसकी पार्टनर ने एक नया सपना देखा सोशल मीडिया पर ‘मॉम इंफ्लुएंसर’ बनने का। उसने बच्चों की तस्वीरें और “डे इन द लाइफ” जैसे वीडियो पोस्ट करने शुरू कर दिए। वह चाहती थी कि यह एक फैमिली ब्रांड बने जिससे कमाई हो सके।

बच्चो की मासूमियत इंटरनेट पर बेचना कितना सही?

इस पिता ने साफ कहा कि वह इस विचार से असहमत है। उसके अनुसार,'मैंने अपने बच्चों को कैमरों और कॉमेंट्स की दुनिया में बड़ा करने का सपना नहीं देखा। मैं उन्हें एक सामान्य, सुरक्षित और स्क्रीन-फ्री बचपन देना चाहता हूं।' जब उसने अपनी राय पार्टनर के सामने रखी तो उसने उसे कंट्रोलिंग और बच्चों की संभावनाओं को सीमित करने वाला कहा।

सोशल मीडिया पर बच्चों की मौजूदगी फायदा कम ज्यादा नुकसान

इस पिता के विचारों को Reddit पर अधिकांश लोगों का सपोर्ट मिला। लोगों का कहना है कि बच्चों को इस तरह का एक्सपोजर देना न केवल उनका बचपन छीन सकता है, बल्कि यह भावनात्मक शोषण भी बन सकता है। बच्चे यह तय करने की स्थिति में नहीं होते हैं कि वे कैमरे पर आना चाहते हैं या नहीं। उन्हें एक सामान्य बचपन का अधिकार है।

क्या कहते हैं चाइल्ड एक्सपर्ट

चाइल्ड साइकाइट्रिस्ट का मानना है कि सोशल मीडिया पर पले-बढ़े बच्चे अपनी पहचान खोजने में मुश्किल महसूस करते हैं। जब बच्चे हर समय ऑनलाइन होते हैं, तो उनकी खुद की पहचान ‘क्यूट, फनी और ऑबीडिएंट’ जैसे एल्गोरिदम से तय होती है, न कि उनकी असल सोच से। यह उनके आत्म-सम्मान, आत्म-विश्वास और व्यक्तिगत विकास को प्रभावित कर सकता है।

बच्चे को इंफ्लूएंसर बनाना कितना सही?

सोशल मीडिया एक मौका हो सकता है, लेकिन जब उसमें बच्चों की निजता और सुरक्षा शामिल हो, तो सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए। बच्चे कोई ब्रांड नहीं हैं। उन्हें वह बचपन मिलना चाहिए जो बिना कैमरों, बिना व्यूज और बिना लाइक्स के भी कीमती होता है।

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