Relationship: क्या ऐसे रिश्ते में रहना सही है, जहां शादी और बच्चों पर सहमति न हो?

Published : Jan 25, 2026, 02:24 PM IST
relationship goals mismatch

सार

जब कोई रिश्ता प्यार से भरा होता है, लेकिन शादी और बच्चों जैसे बड़े जिंदगी के फैसलों पर असहमति होती है, तो स्थिति मुश्किल हो जाती है। यह आर्टिकल उस इमोशनल टकराव के बारे में बताता है जो तब होता है जब एक महिला अपने भविष्य को लेकर साफ होती है…

Relationship Goals Mismatch: कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ला खड़ा करती है जहां दिल और दिमाग एक-दूसरे से उलट बात करने लगते हैं। प्यार मौजूद होता है, साथ अच्छा लगता है, लेकिन भविष्य की तस्वीर साफ़ नहीं होती। यह कहानी भी एक ऐसी महिला की है, जिसने रिश्ते की शुरुआत में ही ईमानदारी से अपने सपने रख दिए थे-शादी और बच्चे। वह जल्दबाज़ी नहीं चाहती थी, बस यह जानना चाहती थी कि सामने वाला भी उसी दिशा में सोच रहा है। शुरू में उसे भरोसा दिया गया, लेकिन समय के साथ वही भरोसा सवाल बन गया।

साफ बात के बावजूद बदला हुआ रुख

रिश्ते की शुरुआत में दोनों ने एक जैसी जिंदगी की कल्पना की थी। महिला ने अपने पिछले प्रेग्नेंसी लॉस के बारे में खुलकर बताया था, जो उसके लिए सिर्फ एक बीता हुआ अनुभव नहीं, बल्कि गहरा इमोशनली सच था। उसका पार्टनर यह सब जानता था और तब उसने हामी भरी थी। लेकिन जब उसी विषय पर दोबारा बात हुई, तो उसका जवाब बदल गया। उसने कहा कि वह शादी और बच्चों को लेकर पक्का नहीं है, और यह भी कि वह किसी “परफेक्ट हालात” के बिना बच्चा नहीं चाहता। यह सुनना उस महिला के लिए बहुत तकलीफदेह था।

प्यार के साथ अनिश्चितता का बोझ

यह रिश्ता बाहर से अच्छा दिखता था- देखभाल, सपोर्ट और भावनात्मक जुड़ाव मौजूद था। महिला को यकीन था कि वह उससे प्यार करता है। उसने उसके साथ भविष्य देखा था, अपने बच्चों का पिता उसी में देखा था। आर्थिक या करियर की कोई बड़ी चिंता भी नहीं थी। फिर भी, जब जिंदगी के सबसे बड़े फैसलों पर एक इंसान “पता नहीं” कहता है, तो दूसरा इंसान असुरक्षित महसूस करने लगता है। खासकर तब, जब समय और उम्र दोनों अहम हों।

जब जरूरतें अलग दिशा में हों

यह सवाल सिर्फ शादी या बच्चों का नहीं था, बल्कि इम्पोटेंट्स का था। महिला जानती थी कि वह क्या चाहती है, और वह सालों तक ऐसे रिश्ते में नहीं रह सकती जहां भविष्य अधर में लटका हो। वह किसी पर दबाव नहीं डालना चाहती थी, लेकिन खुद से झूठ भी नहीं बोल सकती थी। प्यार जरूरी है, लेकिन क्या सिर्फ प्यार ही काफी है, जब जिंदगी के बुनियादी सपने मेल न खाते हों?

सही फैसला हमेशा आसान नहीं होता

आखिरकार, उसे यह भी पता चला कि उसका पार्टनर ईमानदार नहीं था और उसने धोखा दिया था। इससे उसका फैसला और साफ हो गया। यह कहानी याद दिलाती है कि सही फैसला हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन जरूरी होता है। जब रिश्ते में प्यार हो, लेकिन दिशा अलग-अलग हो, तो खुद की जरूरतों और भविष्य का सम्मान करना भी आत्म-प्यार ही है। कभी-कभी किसी को छोड़ना, किसी नए और सच्चे भविष्य की ओर पहला कदम होता है।

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क्या है लोगों की राय

रेडिट पर लड़की स्टोरी परढ़कर लोगों नेअपनी देते हुए कहा कि वह तुमसे शादी नहीं करना चाहता था, इसलिए वह कभी नहीं करेगा। वह तुम्हारे साथ बच्चे नहीं चाहता, इसलिए वह कभी नहीं चाहेगा। तुम शादी करना चाहती हो। तुम बच्चे चाहती हो। लेकिन यह उसके साथ नहीं होगा। एक अन्य ने कहा कि 7 महीने और वह पहले से ही ज़िंदगी के बड़े लक्ष्यों से पीछे हट रहा है? यह अपने आप में काफी साफ जवाब है - जब कोई आपको दिखाता है कि वह कैसा है, तो पहली बार में ही उस पर विश्वास करें।

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