छोड़ कर जिस को गए थे आप कोई और था,
अब मैं कोई और हूँ वापस तो आ कर देखिए !
- जावेद अख्तर
बहाना ढूंढते रहते हैं कोई रोने का
हमें ये शौक़ है क्या आस्तीं भिगोने का
-जावेद अख्तर
दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं
ज़ख़्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं
- जावेद अख्तर
तू तो मत कह हमें बुरा दुनिया
तू ने ढाला है और ढले हैं हम
- जावेद अख्तर
बंध गई थी दिल में कुछ उम्मीद सी
ख़ैर तुम ने जो किया अच्छा किया
-जावेद अख्तर