खौफ के बीच खूबसूरत तस्वीर: पैदा होते ही पॉजिटिव हुए मासूम, डॉक्टर मां की तरह गोद में लिए निभा रहीं फर्ज

Published : Apr 25, 2021, 12:49 PM IST
खौफ के बीच खूबसूरत तस्वीर: पैदा होते ही पॉजिटिव हुए मासूम, डॉक्टर मां की तरह गोद में लिए निभा रहीं फर्ज

सार

दिल खुश कर देने वाली यह तस्वीर भोपाल के सबसे बड़े हमीदिया अस्पताल के प्रेग्नेंट लेडी कोविड वार्ड की है। जहां दो नवजात संक्रमित को अस्पताल की डॉक्टर सोनाली और  डॉ. अपर्णा अपने गोद में लिए हुए हैं। वह समय-समय पर उनको ताजी हवा में बाहर भी लाती है, साथ ही पॉजिटिव मां के पास जाकर दूध पिलाती हैं। 

भोपाल (मध्य प्रदेश). पूरे देश में कोरोना से हाहाकार मचा हुआ है, जिसकी चपेट में आने से कोई नहीं बच पा रहा है। जो अभी दुनिया में आए भी नहीं आए, यानि जो शिशु गर्भवती महिला के पेट में हैं, वह भी पैदा होते ही संक्रमित हो रहे हैं। जहां लेडी डॉक्टर और नर्सें नवजातों की मां बनकर मानवता का फर्ज निभा रही हैं। ऐसी ही एक खूबसूरत तस्वीर राजधानी भोपाल से सामने आई है, जहां दो महिला डॉक्टर मासूमों गोद में लिए हुए हैं।

डॉक्टर के साथ निभाती हैं मां का फर्ज भी
दरअसल, दिल खुश कर देने वाली यह तस्वीर भोपाल के सबसे बड़े हमीदिया अस्पताल के प्रेग्नेंट लेडी कोविड वार्ड की है। जहां दो नवजात संक्रमित को अस्पताल की डॉक्टर सोनाली और  डॉ. अपर्णा अपने गोद में लिए हुए हैं। वह समय-समय पर उनको ताजी हवा में बाहर भी लाती है, साथ ही पॉजिटिव मां के पास जाकर दूध पिलाती हैं। दोनों डॉक्टरों का कहना है कि जल्द ही यह बच्चे  निगेटिव हो जाएंगे।

10 नवजातों में से 7 ठीक होकर जा चुके हैं घर
बता दें कि अस्तपाल के लेडी कोविड ब्लॉक में पिछले एक महीने में 10 ऐसे नवजात बच्चे भर्ती हो चुके हैं। जो जन्म के बाद से संक्रमण के शिकार हुए। इनमें से 7 बच्चे सिर्फ 5 दिन में ठीक होकर अपने  घर चा चुके हैं। जबकि वार्ड में अभी तीन और नवजात हैं जो जल्द ही निगेटिव हो जाएंगे। डॉक्टर सोनाली का कहना है कि इन बच्चों की मां यानि गर्भवती डिलीवरी के वक्त संक्रमित थीं। जिनके जरिए मासूम भी पॉजिटिव हो गए।

मां के दूध बच्चों के लिए कवच
गांधी मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव ने बताया कि जिस किसी पॉजिटिव महिला की डिलीवरी होती है तो उसके नवजात का तुरंत आरटीपीसीआर टेस्ट होता है। नवजात संक्रमित होता है तो उसका बच्चों को वार्ड में इलाज शुरू हो जाता है। ऐसे समय सिर्फ संक्रमित मां का दूध ही बच्चे को पिलाया जाता है। क्योंकि दूध पिलाने से संक्रमण फैले, ऐसे केस अब तक नहीं मिले हैं। बल्कि दूध पीने से बच्चों की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

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