मौत के ढाई साल बाद होगा अंतिम संस्कार, बिना गलती के मिली इतनी बड़ी सजा..जानिए क्या है पूरा मामला

Published : Apr 05, 2021, 07:48 PM ISTUpdated : Apr 05, 2021, 07:49 PM IST
मौत के ढाई साल बाद होगा अंतिम संस्कार, बिना गलती के मिली इतनी बड़ी सजा..जानिए क्या है पूरा मामला

सार

जुलाई 2018 में  धारावी में एक 17 साल के लड़के की संदिग्ध परिस्थितियों मौत हो गई थी। मृतक के परिवार का आरोप था कि पुलिस की पिटाई की वजह से उनके लड़के की मौत हुई है, इस वजह से परिवार वाले दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग पर अड़े थे। तब से ही उसकी डेड बॉडी मॉर्चरी में रखी थी। 

मुंबई (महाराष्ट्र). जब किसी की मौत होती है तो उसका अंतिम संस्कार हर हाल में एक दिन या दो से चार दिन के अंदर कर दिया जाता है। लेकिन मुंबई से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक लड़के की मौत के ढाई साल बाद उसका अंतिम संस्कार होगा। इतने समय तक मृतक की डेड बॉडी मॉर्चरी में रखी थी। अब कोर्ट के फैसले के बाद उसका अंतिम क्रिया क्रम होगा।

ढाई साल से मॉर्चरी में रखी थी डेड बॉडी
दरअसल, जुलाई 2018 में  धारावी में एक 17 साल के लड़के की संदिग्ध परिस्थितियों मौत हो गई थी। मृतक के परिवार का आरोप था कि पुलिस की पिटाई की वजह से उनके लड़के की मौत हुई है, इस वजह से परिवार वाले दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग पर अड़े थे। तब से ही उसकी डेड बॉडी मॉर्चरी में रखी थी। इसके बाद मामला अदालत में चला गया था।

 6 अप्रैल के बाद होगा अंतिम संस्कार
अब कहीं जाकर कोर्ट ने परिवार वालों की मांग पर 6 अप्रैल तक दोबारा पोस्टमार्टम करने का आदेश दिया है। पोस्टमार्टम करने के बाद लड़के की डेड बॉडी उसके परिवार वालों को सौंप दी जाएगी। फिर परिवार अपने बेटे का  ढाई साल बाद अंतिम संस्कार कर सकेंगे।

पोस्टमॉर्टम वाले सभी डॉक्टर होंगे नए
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जेजे अस्पताल के डीन को दोबारा पोस्टमॉर्टम करने के लिए एक नई टीम बनाए। इसके बाद  दोबारा शव का पोस्टमार्टम कराएं। साथ ही कहा कि इस टीम में वह डॉक्टर नहीं होंगे, जो पहले वाले पोस्टमार्टम में शामिल थे। इसके बाद पोस्टमार्टम होने के बाद रिपोर्ट  डीन के सिग्नेचर के साथ रिपोर्ट सब्मिट करनी होगी।

ये है पूरा मामला
बता दे कि जुलाई  2018 में एक मोबाइल चोरी के मामले में पुलिसवालों ने मृतक लड़के को आरोपी बनाकर हिरासत में लिया था। इस लड़के का नाम सचिन जैसवार था और उसकी उम्र उस दौरान 17 साल थी। परिवारवालों का आरोप है कि मामले में कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई थी और पुलिसकर्मियों ने जबरन उनके बेटे को पकड़ लिया था। उसे  पुलिस कस्टडी में रख गंदे तरीके से टॉर्चर किया, बुरी तरह पीटा गया। इस दौरान पीड़ित परिवार ने पुलिस के पास जाकर बेटे को छोड़ देने की मिन्नतें मांगी। तब कहीं जाकर उसे छोड़ा गया। जिसके बाद माता-पिता उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन पहुंचते ही उसकी मौत हो गई। सचिन के पिता  पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना चाहते हैं, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सचिन की मौत का कारण निमोनिया को बताया गया है। जिसके बाद परिजनों ने मामला अदालत में डाल दिया, अब वह दोबारा पोस्टमार्टम कराना चाहते हैं।

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