
नई दिल्ली: जातीय हिंसा प्रभावित मणिपुर में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 5000 और जवान भेजने का फैसला किया है। अतिरिक्त बलों की तैनाती तुरंत शुरू होगी।
मणिपुर में पहले से ही लगभग 21000 केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान तैनात हैं। फिर भी स्थिति नियंत्रण में नहीं आने के कारण गृह मंत्रालय ने 50 सीएपीएफ कंपनियां (लगभग 5000 जवान) भेजने का फैसला किया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लगातार दूसरे दिन गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक की और मणिपुर में और अधिक बल भेजकर स्थिति को जल्द से जल्द नियंत्रण में लाने का निर्देश दिया। सूत्रों के मुताबिक, उनकी बैठक के बाद ही 5000 जवानों को मणिपुर भेजने का फैसला लिया गया।
पिछले साल मई से मणिपुर में हिंसा जारी है, जिसमें अब तक लगभग 300 लोग मारे जा चुके हैं। हजारों लोग बेघर हो गए हैं। कुछ दिनों के लिए शांत हुई स्थिति हाल ही में 10 कुकी/मिजो उग्रवादियों की हत्या और उग्रवादियों द्वारा अगवा किए गए 6 मैतेई लोगों की हत्या के बाद फिर से बिगड़ गई है। सीएम, मंत्री सहित 13 विधायकों के घरों पर हमले हुए हैं।
मणिपुर में लगातार हिंसा होने के बावजूद इसे नियंत्रित करने में नाकाम रहने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए, कांग्रेस पार्टी ने यह मांग की है। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मणिपुर का दौरा करना चाहिए।
सोमवार को मणिपुर के कांग्रेस नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, 'मणिपुर में डबल इंजन सरकार पूरी तरह विफल रही है।
डेढ़ साल से पूर्वोत्तर राज्य जल रहा है। प्रधानमंत्री कई देशों का दौरा कर भाषण देते हैं, लेकिन मणिपुर जाने का उनके पास समय नहीं है। उन्हें समय निकालकर मणिपुर जाना चाहिए और वहां के लोगों, राजनीतिक दलों और राहत शिविरों में रह रहे लोगों से मिलना चाहिए। संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाकर मणिपुर संकट पर चर्चा करनी चाहिए।'
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