आदिवासियों के उत्पादों की बिक्री के लिए देश में खुलेंगे 60 हजार वन धन विकास केंद्र, एक सेंटर की कीमत होगी 45 लाख

Published : Oct 12, 2019, 05:54 PM IST
आदिवासियों के उत्पादों की बिक्री के लिए देश में खुलेंगे 60 हजार वन धन विकास केंद्र, एक सेंटर की कीमत होगी 45 लाख

सार

लघु वनोपजों और आदिवासियों के अलग-अलग उत्पादों की मार्केटिंग तथा बिक्री के लिये देश भर में 60,000 से अधिक "वन धन विकास केंद्र" खोले जायेंगे। ऐसा हर केंद्र 45 लाख रुपये की लागत से खोला जायेगा। ऐसे करीब 600 केंद्रों की जगह तय भी कर ली गयी है।

इंदौर. लघु वनोपजों और आदिवासियों के अलग-अलग उत्पादों की मार्केटिंग तथा बिक्री के लिये देश भर में 60,000 से अधिक "वन धन विकास केंद्र" खोले जायेंगे। ऐसा हर केंद्र 45 लाख रुपये की लागत से खोला जायेगा। ऐसे करीब 600 केंद्रों की जगह तय भी कर ली गयी है। जनजातीय कार्य राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने एक सवाल पर कहा कि वह मध्यप्रदेश में सामाजिक प्रथा के नाम पर बांछड़ा समुदाय की युवतियों को देह व्यापार में जबरन धकेले जाने के विषय की जानकारी लेंगी और इसके बाद उचित कदम उठाये जायेंगे। 

हिंदू समाज का हिस्सा हैं आदिवासी 
देश के आदिवासियों को हिंदू समुदाय का हिस्सा बताते हुए जनजाति कार्य राज्यमंत्री मंत्री रेणुका सिंह ने शनिवार को कहा कि "कुछ असामाजिक तत्वों" द्वारा इस तबके के लोगों को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य का लालच देकर उनका धर्म बदलवाने के प्रयास दु:खदायी हैं। सिंह ने इंदौर प्रेस क्लब में संवाददाताओं से कहा, "आदिवासी, हिंदू हैं। लेकिन बहुत जगह भ्रम की स्थिति पैदा हो गयी है। कुछ असामाजिक तत्व विदेश से फंड लाते हैं और आदिवासियों की गरीबी तथा अज्ञानता का फायदा उठाकर अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर उन्हें (धर्मांतरण के लिये) दुष्प्रेरित करते हैं। यह स्थिति दु:खदायी है।"

धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून की जरूरत 
उन्होंने कहा, "इस तरह के लालच देकर धर्मांतरण के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर फिलहाल कोई कानून नहीं है। लेकिन शिकायतें मिलने पर हम आदिवासियों को समझाते हैं कि वे जिस जाति-धर्म में पैदा हुए हैं, उसी में रहें क्योंकि सरकार उनके हितों का पूरा ध्यान रख रही है।" सिंह ने कहा कि धर्मांतरित आदिवासियों के "दोहरा फायदा" लेने के खिलाफ समाज में जागरूकता बढ़ रही है और ऐसे लाभ उठाने वाले लोगों को लेकर जनजातीय युवाओं में थोड़ा आक्रोश भी है। जनजातीय कार्य राज्य मंत्री ने एक सवाल पर कहा, "फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है कि जातिगत आरक्षण प्रणाली की समीक्षा की जाये या यह व्यवस्था खत्म कर दी जाये। अभी लोगों को जातिगत आरक्षण की जरूरत है।"

बघेल को गांधी के विचारों को फिर से पढ़ने की जरूरत 
सिंह ने एक सवाल पर कहा कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जाति का मसला बहुत विवादित है। उन्होंने कहा, "वैसे तो यह मामला अदालत के फैसले पर निर्भर है। लेकिन मैं यह तो कह सकती हूं कि वह (जोगी) आदिवासी नहीं हैं।"महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोड़से का नाम लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा भाजपा के खिलाफ सियासी हमलों पर केंद्रीय मंत्री ने एक हिन्दी मुहावरे के प्रयोग से पलटवार किया। छत्तीसगढ़ से ही ताल्लुक रखने वाली भाजपा नेता ने कहा, "खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे। पिछले लोकसभा चुनावों में 18 प्रांतों में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला है। बघेल को खासकर स्वच्छता को लेकर गांधी के विचारों को अच्छे से पढ़ना चाहिये।"

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

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