
9 years of Modi Government: एक तरफ बीजेपी ने जहां मोदी सरकार के 9 साल पूरा होने पर पूरे देश में धूमधाम से सेलिब्रेट करने का प्लान बनाया है तो दूसरी ओर कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की आय दोगुना करने के वादें समेत 9 ज्वलंत सवाल कर केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार ने नौ साल के कार्यकाल में जनता के साथ विश्वासघात किया और उसे इसके लिए माफी दिवस मनाना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि 30 मई को 'माफी दिवस' के रूप में चिंहित किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने पूछे 9 सवाल...
कांग्रेस के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में मोदी सरकार के 9 साल पूरे होने पर 9 सवाल पूछे। जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व प्रमुख राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए थे और नौ सवाल उसी पर आधारित हैं। प्रेस कांफ्रेंस में जयराम रमेश के अलावा पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत भी मौजूद रहें। कांग्रेस ने 'नौ साल, नौ सवाल' वाला एक बुकलेट भी रिलीज किया।
इन 9 सवालों का कांग्रेस ने मांगा जवाब...
वादे और हकीकत में काफी अंतर
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि पिछले नौ साल में सरकार ने जो वादे किए थे, वे हकीकत से अलग हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए जब हम जवाब मांगते हैं तो हमें कहा जाता कि 900 साल पीछे मत ले जाइए। हर कोई जानना चाहता है कि आपने पिछले नौ साल में क्या किया...हम आपसे (प्रधानमंत्री से) अगले साल होने वाले कार्यक्रमों के दौरान माफी मांगने का आग्रह करेंगे।
प्रधानमंत्री इन नौ सवालों पर अपनी चुप्पी तोड़ें...
जयराम रमेश ने कहा, "हम चाहते हैं कि पीएम इन नौ सवालों पर अपनी चुप्पी तोड़ें।" उन्होंने सवालों की फेहरिस्त एक बुकलेट के माध्यम से जारी की है। रमेश ने पूछा कि आप विपक्षी दलों और नेताओं के खिलाफ बदले की राजनीति क्यों कर रहे हैं और आप लोगों द्वारा चुनी गई सरकारों को अस्थिर करने के लिए घोर धन बल का उपयोग क्यों कर रहे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बजट में कटौती करके और प्रतिबंधात्मक नियम बनाकर गरीबों, जरूरतमंदों और आदिवासियों के कल्याण के लिए योजनाओं को कमजोर कर दिया है। ऐसा क्यों है कि COVID-19 के कारण 40 लाख से अधिक लोगों की दुखद मौत के बावजूद, मोदी सरकार ने उनके परिवारों को मुआवजा देने से इनकार कर दिया है? आपने अचानक लॉकडाउन क्यों लगाया जिसने लाखों श्रमिकों को घर लौटने के लिए मजबूर किया और कोई भी सहायता नहीं दी।
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