केजरीवाल के दिल्ली मॉडल को AAP MLA ने किया एक्सपोज, विधानसभा में कहा- गटर का पानी पी रहे लोग

Published : Aug 16, 2023, 01:23 PM ISTUpdated : Aug 16, 2023, 02:05 PM IST
Arvind Kejriwal

सार

दिल्ली विधानसभा में आप के विधायक ने ही अरविंद केजरीवाल सरकार की पोल खोल दी। विधायक ने कहा कि फंड नहीं होने के चलते दिल्ली के लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा है। वे गटर का पानी पीने को विवश हैं। 

नई दिल्ली। बुधवार से दिल्ली विधानसभा (Delhi Assembly) के सत्र की शुरुआत हुई है। पहले दिन ही आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक ने ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार की पोल खोल दी है। विधायक भूपिंदर सिंह जून (Bhupinder Singh Joon) ने कहा कि दिल्ली के लोग गटर का पानी पीने को विवश हैं।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दावा करते हैं कि उनकी सरकार दिल्ली में लोगों को मुफ्त पीने का पानी दे रही है। हालांकि इस दावे की हकीकत क्या है यह बुधवार को दिल्ली विधानसभा में सामने आ गई। सच्चाई सामने लाई है आप के अपने विधायक भूपिंदर सिंह जून ने।

ठप पड़ा है दिल्ली जल बोर्ड का काम

भूपिंदर सिंह ने विधानसभा में कहा, "मैं जिस सवाल को उठा रहा हूं उसका संबंध सिर्फ मेरी विधानसभा सीट से नहीं दूसरी विधानसभा क्षेत्रों से भी है। पिछले एक-डेढ़ साल से दिल्ली जल बोर्ड का काम बिल्कुल ठप पड़ा है। कोई भी काम नहीं हो पा रहा है। लोग गंदा पानी, गटर का पानी, बदबूदार पानी, दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। उसका रिजल्ट क्या हुआ, लोग बीमार पड़ने शुरू हो गए। खासतौर पर बुजुर्ग और बच्चे। जब भी अधिकारियों से बात हो जल बोर्ड में एक ही जवाब मिलता है कि फंड्स नहीं हैं। और यह बात कहीं तक सही भी है।"

 

 

विधायक के ऑफिस में गंदा पानी लेकर आते हैं लोग

विधायक ने कहा, "जल बोर्ड के एस्टीमेट कमेटी के बड़े-बड़े अधिकारियों से बात हुई। उन्होंने बताया कि हर विधानसभा का बजट निगेटिव में है। कोई काम नहीं हो पा रहा है, जिससे जनता परेशान है। विधायक के ऑफिस में लोग गंदे पानी के बॉटल भरकर लेकर आते हैं। वो बिल्कुल गटर का पानी है जो कोई इंसान छू भी नहीं सकता। ऐसा पानी पीने के लिए लोग मजबूर हैं। बहुत से ऐसे इलाके हैं जहां पानी की पाइपलाइन 30-40 साल पुरानी है। उन्हें बदलना है। एस्टीमेट बन गया। वर्क ऑर्डर हो गया। एजेंसी का चुनाव हो गया, लेकिन फंड नहीं है, काम शुरू नहीं हो पा रहा है। बोरवेल को स्वीकृति मिली हुई है, लेकिन काम नहीं हो रहा। क्योंकि फंड नहीं है। इसी साल 31 जुलाई को टैंकरों का पिछला कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया। नए टैंकर इसलिए हायर नहीं हो रहे हैं कि फंड नहीं है। लोग जाएं तो जाएं कहां?"

उन्होंने कहा, “वित्त विभाग ग्रांड जारी नहीं कर रहा है। पानी आवश्यक चीज है। इसके बिना लोग एक दिन भी जी नहीं सकते। लोग प्राइवेट टैंकरों से रॉ वाटर पी रहे हैं, जिससे बीमारियां बढ़ रही हैं। अध्यक्ष जी मेरा आपके माध्यम से यह निवेदन है कि फाइनेंस विभाग को निर्देश दिया जाए कि वो फंड रिलीज करे ताकि लोगों का जीवन स्वस्थ रहे। लोगों को साफ पानी मिल सके। नहीं तो अध्यक्ष जी महामारी फैलने वाली है। जिसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? वित्त विभाग तो हाथ खड़े कर देगा कि हम जिम्मवार नहीं है, लेकिन बिना फंड्स के तो जल बोर्ड भी काम नहीं कर सकता।”

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