
गुवाहाटी, असम. कामरूप पुलिस ने यहां 3 ड्रग्स तस्करों को पकड़कर उनके पास से बड़ी मात्रा में ड्रग्स जब्त की है। असम में ड्रग्स माफियाओं(drugs mafia) के खिलाफ ताबड़तोड़ एक्शन लिए जा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में ही करोड़ों रुपए कीमत की ड्रग्स पकड़ी गई है। कामरूप के SP हितेश रॉय ने बताया-हमने एक ट्रक से 500 ग्राम हेरोइन और 1.50 लाख याबा टैबलेट ज़ब्त किए हैं। इनकी कीमत लगभग 42 करोड़ रुपये है। 3 लोगों को गिरफ़्तार किया है, जिसमें से 2 मणिपुर के रहने वाले हैं और एक पश्चिम बंगाल से है।
कुछ दिन पहले भी पकड़े गए थे तीन लोग
इससे पहले गुवाहाटी (Guwahati) की गोरचुक पुलिस (Police) की टीम ने ड्रग्स तस्करी के मामले में तीन तस्करों को पकड़ा था। इन्हें साउकुची, दातालपाड़ा और कटाहबारी इलाके से गिरफ्तार किया था। इनके पास से 119.24 ग्राम हेरोइन, भारी मात्रा में प्लास्टिक के छोटे-छोटे कंटेनर, नगद 34,000 रुपए जब्त हुए थे। पकड़ी गई हेरोइन की कीमत 20 लाख रुपये आंकी गई। पकड़े गए आरोपियों की पहचान वशिष्ठ निवासी हृतिक सिंह, बिहार (Bihar) निवासी राहुल खारुआ और कामरूप जिला के रंगिया निवासी जीतू मोनी कलिता के रूप में की हुई थी।
म्यांमार बना हुआ है ड्रग्स का सबसे बड़ा गढ़
याबा टैबलेट को नशेड़ी भारत में भूल-भुलैया कहते हैं। इस ड्रग्स का गढ़ म्यांमार को माना जा रहा है। इस ड्रग्स कई देशों में बैन है। याबा लाल रंग की ड्रग्स है। इसे शॉर्ट में WY भी कहते हैं। आम बोलचाल में इसको पागलपन की दवा(madness drug) भी कहा जाता है। इस ड्रग्स का निर्माण म्यांमार में होता है। यहां से यह ड्रग्स भारत सहित लाओस, थाइलैंड के अलावा दक्षिण-पूर्व बांग्लादेश आदि सप्लाई होती है। वैसे इस दवा का ईजाद पहाड़ी घोड़ों के लिए किया गया था, ताकि वे जोश में रहे और बिना रुके पहाड़ चढ़ते जाएं। हालांकि जब इसका इस्तेमाल नशेड़ियों ने करना शुरू किया, तो म्यांमार में 20 ग्राम से अधिक याबा मिलने पर उम्रकैद या मौत की सजा का प्रावधान किया गया। ड्रग्स उग्रवादियों की फंडिंग का एक बड़ा जरिया है। याबा कई उत्तेजक दवाओं से मिलकर बनती है। इसमें मुख्य पदार्थ कैफीन और मेथेम्फेटामाइन हैं।
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