
नई दिल्ली। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद विवादों में आए अदाणी समूह ने इजराइल के हाइफा बंदरगाह का अधिग्रहण कर बड़ा कारनामा किया है। इसके लिए समूह ने 1.2 बिलियन डॉलर का भुगतान किया है। भारत में इजराइल के दूत नोर गिलोन ने बुधवार को कहा कि अडाणी समूह ने हाइफा बंदरगाह का अधिग्रहण करने के लिए पूरा भुगतान किया है।
भारत और इजराइल के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने के 30 साल पूरे होने पर नोर गिलोन ने कहा कि अदाणी समूह द्वारा किया गया निवेश 'रणनीतिक' रूप से काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अदाणी समूह इजराइल में और अधिक निवेश करेगी।
रणनीतिक संपत्ति है हाइफा पोर्ट
नोर गिलोन ने कहा, "मेडिटेरेनियन में हमारे पास दो पोर्ट हैं। हाइफा रणनीतिक संपत्ति है। हमने इसे एक भारतीय कंपनी को दिया है। हमारे दृष्टिकोण से इसका बहुत अधिक प्रतीकात्मक संदेश है। भारत के साथ हमारा रिश्ता इतना विश्वास से भरा है कि हमने एक भारतीय कंपनी के हाथ में अपनी रणनीतिक संपत्ति दे दी है।"
नेतन्याहू ने सौदे को बताया मील का पत्थर
बता दें कि पिछले महीने अदाणी समूह ने 1.2 बिलियन डॉलर में हाइफा बंदरगाह का अधिग्रहण किया। इसके साथ ही कंपनी ने तेल अवीव में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब खोलने सहित इजराइल में और अधिक निवेश करने का वादा किया है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अदाणी समूह के साथ हुए हाइफा बंदरगाह के सौदे को मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि इससे भारत और इजराइल के बीच कनेक्टिविटी में काफी सुधार होगा।
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दरअसल, अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अदाणी समूह की कंपनियां परेशानी में हैं। अदाणी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई है, जिससे कंपनी के शेयरों की कीमत काफी गिर गई है। ऐसे में इजराइल के पोर्ट के अधिग्रहण से कंपनी को राहत मिलने की उम्मीद है।
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