पहले 59 ऐप बैन, अब रखा चीन की दुखती रग पर हाथ, दोहरी चोट से बौखला जाएगा ड्रैगन

Published : Jul 02, 2020, 10:23 AM ISTUpdated : Jul 02, 2020, 11:18 AM IST
पहले 59 ऐप बैन, अब रखा चीन की दुखती रग पर हाथ, दोहरी चोट से बौखला जाएगा ड्रैगन

सार

पूर्वी लद्दाख में चीन की हरकत के बाद भारत आर्थिक और कूटनीतिक तरीके से जवाब देने का मन बना चुका है। पहले मोदी सरकार ने 59 चीनी ऐप्स बैन कर चीन को झटका दिया, लेकिन अब चीन की दुखती रग पर हाथ रखा है। भारत ने हॉन्ग कॉन्ग में चीन के नए सुरक्षा कानून पर ना केवल इशारों में सवाल उठाए, बल्कि चीन को फटकार भी लगा दी। 

नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में चीन की हरकत के बाद भारत आर्थिक और कूटनीतिक तरीके से जवाब देने का मन बना चुका है। पहले मोदी सरकार ने 59 चीनी ऐप्स बैन कर चीन को झटका दिया, लेकिन अब चीन की दुखती रग पर हाथ रखा है। भारत ने हॉन्ग कॉन्ग में चीन के नए सुरक्षा कानून पर ना केवल इशारों में सवाल उठाए, बल्कि चीन को फटकार भी लगा दी। 

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत ने हॉन्ग कॉन्ग के मुद्दे पर अपनी राय रखी। भारत ने कहा, हॉन्ग कॉन्ग को स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव क्षेत्र बनाना चीन का घरेलू मामला है, लेकिन हम हाल की घटनाओं पर नजर बनाए हुए है। 

'मुद्दे का उचित, निष्पक्ष समाधान किया जाए'
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजीव चंदर ने चीन का नाम लिए बिना कहा, हम हाल की घटनाओं पर चिंता जताने वाले कई बयान सुन चुके हैं। हमें उम्मीद है कि संबंधित पक्ष इन बातों का ध्यान रखेंगे और इसका उचित, गंभीर और निष्पक्ष समाधान करेंगे। 
 
पहली बार हॉन्ग कॉन्ग मुद्दे पर बोल
भारत ने पहली बार हॉन्ग कॉन्ग मुद्दे पर अपनी राय रखी है। नई दिल्ली का यह बयान दुनिया में मानवाधिकार स्थिति पर हो रही चर्चा के दौरान आया। चीन के साथ तनाव के बीच यूएन में भारत की ओर से हॉन्ग कॉन्ग मुद्दा उठाया जाना एक रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। 

27 देशों ने हॉन्ग कॉन्ग को घेरा
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि भारत भी हॉन्गकॉन्ग के मुद्दे पर चीन को घेरे। चीन के नए हॉन्ग कॉन्ग में लोगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। इस मामले में UNHRC में 27 देशों ने चीन से हॉन्ग कॉन्ग  में लागू किए गए कानून पर विचार करने को कहा है। भारत इस मुद्दे पर अभी तक कुछ नहीं बोला। जबकि अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन ने इस मामले में चीन की आलोचना की है। जापान ने भी फ्री और खुले हॉन्ग कॉन्ग का समर्थन किया है।

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