
नई दिल्ली। एयर कमोडोर संजय शर्मा और फ्लाइंग ऑफिसर अनन्या शर्मा ने इतिहास रचा है। वे भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) में काम करने वाले पहले ऐसे पिता-पुत्री हैं, जिन्होंने एक मिशन में एक साथ लड़ाकू विमान उड़ाए। अनन्या शर्मा वायुसेना की पहली महिला फाइटर पायलट हैं।
अनन्या बचपन से ही पिता की तरह आसमान में उड़ने का सपना देखती थी। वह अपने पिता संजय शर्मा की तरह भारतीय वायु सेना की लड़ाकू पायलट बनना चाहती थी। जैसे-जैसे वह बड़ी हुईं उन्होंने अपने सपने को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया और फाइटर पायलट बन गईं।
पहली फाइटर पायलट हैं अनन्या
अनन्या शर्मा भारतीय वायु सेना की पहली महिला फाइटर पायलट हैं। 2016 में वह वायु सेना में शामिल हुईं थी। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन में बीटेक किया है। वह दिसंबर 2021 में फाइटर पायलट बनीं थी। वहीं, अनन्या के पिता एयर कोमोडोर संजय शर्मा 1989 में वायु सेना के फाइटर पायलट बने थे। उन्हें लड़ाकू विमान उड़ाने का लंबा अनुभव है। उन्होंने मिग-21 के स्क्वाड्रन को कमांड भी किया है। वह फ्रंटलाइन फाइटर स्टेशन पर तैनात रहे हैं।
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20 मई 2022 को एक साथ भरी थी उड़ान
पिता-पुत्री की जोड़ी ने 20 मई 2022 को एक साथ लड़ाकू विमान उड़ाकर इतिहास रचा था। दोनों ने कर्नाटक के बिंदर एयर फोर्स स्टेशन से Hawk-132 विमान के एक फॉर्मेशन में उड़ान भरी थी। यहां फ्लाइंग ऑफिसर अनन्या ट्रेनिंग कर रहीं थी। मिग-21 और राफेल जैसे तेज रफ्तार विमान उड़ाने से पहले फाइटर पायलट को Hawk-132 विमान उड़ाने की ट्रेनिंग दी जाती है। संजय शर्मा अनन्या के साथ ट्रेनर के रूप में उड़ान भर रहे थे। भारतीय वायु सेना में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था कि पिता और बेटी एक मिशन में एक साथ लड़ाकू विमान उड़ाए।
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