
नई दिल्ली. देश की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी कामयाबी मिली है। म्यांमार 22 घुसपैठियों को भारत को सौंपेगा। ये सभी असम सहित पूर्वोत्तर के राज्यों में सक्रिया थे। पूरा ऑपरेशन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की निगरानी में हुआ। यह पहली बार है जब म्यांमार की तरफ से घुसपैठियों को भारत को सौंपा जाएगा।
इम्फाल में रुकेगा विमान
घुसपैठियों को लेकर आने वाला विमान पहले इम्फाल में रुकेगा। इसके बाद गुवाहाटी जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घुसपैठियों को मणिपुर और असम पुलिस के हवाले किया जाएगा। ये सभी एनडीएफबी, पीआरईपीएके, एनएनएलएफ, केवाईकेएल, पीएलए और केएलओ गुटों से जुड़े हुए हैं।
- पिछले साल फरवरी में म्यांमार सेना ने गुसपैठियों के खिलाफ अभियान चलाया था। घुसपैठिए म्यांमार में छिप जाते थे। भारतीय सेना भी म्यांमार से सटी सीमा के पास पहुंची थी। बता दें कि म्यांमार के साथ भारत की 1,600 किलोमीटर की सीमा विद्रोही समूहों के शिविरों का अड्डा बनी हुई है। लेकिन म्यांमार की सेना द्वारा ऑपरेशन करने पर सहमति बनने के बाद पिछले कुछ सालों से विद्रोही समूहों पर दबाव बन रहा है।
कौन हैं अजीत डोभाल ?
अजीत कुमार डोभाल आई.पी.एस. (सेवानिवृत्त) हैं और वर्तमान में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। वे 30 मई 2014 से इस पद पर हैं। डोभाल भारत के पांचवे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। इससे पहले शिवशंकर मेनन भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे। अजीत डोभाल 1968 में केरल कैडर से आईपीएस में चुने गए थे। 2005 में इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी के चीफ के पद से रिटायर हुए हैं। वह सक्रिय रूप से मिजोरम, पंजाब और कश्मीर में उग्रवाद विरोधी अभियानों में शामिल रहे हैं। वह पाकिस्तान मं 7 साल तक धर्म बदलकर रहें और देश के लिए जासूसी की।
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