
नई दिल्ली. कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पत्रकारों से बात की। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, आज हमारे गरीब लोगों को पैसों की आवश्यक्ता है। मैं प्रधानमंत्री जी से अपील करता हूं कि पैकेज पर पुनर्विचार करना चाहिए। मनरेगा में 200 दिन का रोजगार दिया जाए और किसानों को सीधे पैसा उनके खाते में ट्रांसफर करने विचार करना चाहिए, क्योंकि ये लोग हमारा भविष्य हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा, देश में आर्थिक तूफान अभी आया नहीं है, आने वाला है। बहुत जबर्दस्त नुकसान होने वाला है। हम चाहते हैं कि सरकार हमारी सुने। हम यानी विपक्ष थोड़ा दबाव डाले और अच्छी तरह से समझाए तो सरकार सुन भी लेगी।
उन्होंने कहा कि जब बच्चों को चोट लगती है तो मां बच्चे को कर्ज नहीं देती है,वो एकदम मदद करती है। भारत माता को अपने बच्चों के लिए साहूकार का काम नहीं करना चाहिए,उसे बच्चों को एकदम पैसा देना चाहिए। जो प्रवासी मजदूर सड़क पर चल रहा है उसे कर्ज की नहीं जेब में पैसे की जरूरत है।
भारत के बारे में सोचिए, रेटिंग के बारे में नहीं
राहुल गांधी ने कहा कि कहा जा रहा है राजकोषीय घाटा बढ़ने की वजह से एजेंसियों की नजर में भारत की रेटिंग कम हो जाएगी। मेरा मानना है कि फिलहाल भारत के बारे में सोचिए, रेटिंग के बारे में नहीं। भारत के सभी लोग अगर ठीक रहेंगे तो एक बार फिर से मिलकर काम करेंगे और रेटिंग अपने आप ठीक हो जाएगा।
धीरे-धीरे लॉकडाउन उठाने के बारे में सोचना होगा
लॉकडाउन को हमें धीरे-धीरे समझदारी से उठाना होगा। क्योंकि यह हमारे सभी समस्याओं का समाधान नहीं है। हमें बुजुर्गों, बच्चों सभी का ख्याल रखते हुए धीरे-धीरे लॉकडाउन उठाने के बारे में सोचना होगा। जिससे कि किसी को कोई खतरा ना हो।
राहुल गांधी अगर प्रधानमंत्री होते तो वो क्या करते?
इस सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नहीं हूं। लेकिन एक विपक्ष के नेता के तौर पर कहूंगा कि कोई भी आदमी घर छोड़कर दूसरे राज्य में जाता है तो काम की तलाश में जाता है। इसलिए सरकार को रोजगार के मुद्दे पर एक राष्ट्रीय रणनीति बनानी चाहिए।
सरकार को तीन टर्म में करना चाहिए काम
राहुल ने कहा कि मेरे हिसाब से सरकार को तीन टर्म शॉट, मिड और लॉन्ग टर्म में काम करना चाहिए। शॉर्ट टर्म में डिमांड बढ़ाइए। इसके तहत आप हिंदुस्तान के छोटे और मंझोले व्यापारियों को बचाइए। इन्हें रोजगार दीजिए। आर्थिक मदद कीजिए। स्वास्थ्य के हिसाब से आप उन लोगों का ख्याल रखिए जिन्हें सबसे ज्यादा खतरा है। वहीं मिड टर्म में छोटे और मझोले व्यापार को मदद कीजिए।
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