
नई दिल्ली. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने इस बात पर अफसोस जताया है कि इतिहास में आजादी के नायकों को सम्मान नहीं हुआ। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह(Amit Shah) तीन दिनी यात्रा पर अंडमान-निकोबार में हैं। दूसरे दिन उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप से अंडमान-निकोबार के लिए विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस मौके पर एक ब्रिज का लोकार्पण हुआ। इसका नाम 'आजाद हिंद फौज ब्रिज' नाम देने का निर्णय किया गया है।
पीएम मोदी ने देश को पहचान दिलाई
अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी ने देश को एक नई पहचान दिलाई है। ब्रिज का उद्घाटन करते हुए शाह ने कहा कि ब्रिज से गुजरने वाला व्यक्ति नेताजी के साहस-पराक्रम को हमेशा श्रद्धांजली देता हुआ गुजरेगा। शाह ने कहा- इस साल हम आजादी का अमृत महोत्सव और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मना रहे हैं। जब हम नेताजी के जीवन को देखते हैं, तो लगता है कि उनके साथ अन्याय हुआ। वे जिस स्थान के हकदार थे, इतिहास में उन्हें नहीं दिया गया। सालों तक कई नेताओं की छवि खराब की जाती रही है। अब उन्हें इतिहास में उचित स्थान देने का समय आ चुका है। इसलिए इस द्वीप का नाम नेताजी के नाम पर रखा। इस मौके पर उनके साथ अंडमान-निकोबार के लेफ्टिनेंट गवर्नर एडमिरल डीके जोशी (रिटायर्ड) भी मौजूद रहे। शाह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन की इस तपोस्थली, संकल्पस्थली पर आज सबसे पहले हज़ारों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और उनके संकल्प को सम्मानपूर्वक नमन करता हूं।
इन प्रोजेक्ट का शिलान्यास
शनिवार को अमित शाह ने यहां 14 परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनकी कुल कीमत 299 करोड़ है। 12 परियोजनाओं का शिलान्यास हुआ है। उसकी लागत 643 करोड़ रुपए है। शाह ने कहा कि अंडमान के छोटे से द्वीप के अंदर लगभग 1,000 करोड़ रुपए के विकास योजनाओं को शुरू कर रहे हैं।
अंग्रेज़ों द्वारा बनाई गई सेल्युलर जेल सबसे बड़ा तीर्थस्थान
यात्रा के पहले दिन यानी शुक्रवार को अमित शाह ने पोर्ट ब्लेयर में ऐतिहासिक सेल्युलर जेल स्थित शहीद स्तंभ गए और महान स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर समेत सभी शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए थे। अमित शाह ने सेल्युलर जेल का दौरा भी किया था। उन्होंने गो-गो टूरिस्ट बसों को झंडी दिखाकर रवाना किया था।
सावरकर पर बोले थे
जो लोग वीर सावरकर की देशभक्ति पर सवाल उठाते हैं, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि एक बार यहां उनकी तपोभूमि के दर्शन करो आपके भ्रम दूर हो जाएंगे। सावरकर जी को वीर की उपाधि सरकार ने नहीं दी बल्कि करोड़ देशवासियों ने सम्मान स्वरुप उनके नाम के आगे वीर शब्द जोड़ा है, जिसे कोई मिटा नहीं सकता। स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा सही गई अनगिनत यातनाओं की कल्पना हम तब तक नहीं कर सकते जब तक हम इस तीर्थस्थल का यातनास्थल न देखें लें। उनकी आत्मा व मनोबल को तोड़ने का विदेशी शासन द्वारा ऐसा क्रूर प्रयास यहाँ होता था फिर भी उन्होंने अपने मन से देशभक्ति की ज्वाला को बुझने नहीं दिया।pic.twitter.com/SZ93BA0LKA
अमित शाह ने ये भी कहा था
अमित शाह ने आज़ादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए था कि उन्हें दूसरी बार आज़ादी के इस तीर्थस्थल पर आने का मौक़ा मिला है और वो जब भी यहां आते हैं, एक नई ऊर्जा और प्रेरणा लेकर जाते हैं। उन्होंने कहा कि ये वो जगह है जहां अनेक जाने-अनजाने स्वतंत्रता सेनानियों ने अमानवीय यातनाएं सहकर और अपना सर्वस्व बलिदान देकर भी वंदे मातरम और भारत माता की जय का उद्घोष किया है। देशभर के लोगों के लिए अंग्रेज़ों द्वारा बनाई गई ये सेल्युलर जेल सबसे बड़ा तीर्थस्थान है और इसीलिए सावरकर जी कहते थे कि तीर्थों में ये महातीर्थ है जहां आज़ादी की ज्योति प्रज्वलित करने के लिए अनेकानेक हुतात्माओं ने बलिदान दिए हैं।
अमित शाह ने कहा कि उनकी इस तीर्थस्थान की ये यात्रा इसीलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये वर्ष आज़ादी के अमृत महोत्सव का वर्ष है, आज़ादी के संग्राम से प्रेरणा लेकर फिर से अपने आप को देश के लिए समर्पित करने का वर्ष है और जब देश की आज़ादी के सौ साल पूरे होंगे, तब भारत कितना महान होगा, इसका संकल्प लेने का वर्ष है। उन्होंने कहा कि इसीलिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इस वर्ष को बहुत उत्साह के साथ आज़ादी का अमृत महोत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया है और देश की जनता इस फ़ैसले से ना केवल ख़ुश है बल्कि इसमें सहभागी बनने के लिए उत्साहित भी है। शाह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन की इस तपोस्थली, संकल्पस्थली पर आज सबसे पहले हज़ारों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और उनके संकल्प को सम्मानपूर्वक नमन करता हूं।
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