
नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन विधेयक बुधवार को राज्यसभा के पटल पर पेश किया गया। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में बिल को लेकर प्रस्तावना रखा। इस दौरान उन्होंने नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर जारी विरोधों पर भी जवाब दिया साथ ही उन्होंने देश से अपील भी की कि मुसलमानों को किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले मुसलमान देश के नागरिक थे, हैं और रहेंगे। बिल को पेश करते हुए कहा कि पाकिस्तान, आफगानिस्तान के मुस्लमानों को देश की नागरिकता के नहीं दी जाएगी। साथ ही विपक्ष को उन्होंने चुनौती भी दी।
राज्यसभा में क्या कहा शाह ने...
1 .देश की जनता इस सदन की बहस को देख रही है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिमों को नागरिकता मिलेगी। यह झूठ फैलाया जा रहा है कि बिल मुस्लिमों के खिलाफ है। मैं पूछना चाहता हूं कि जो देश के नागरिक हैं, उन्हें किस बात की चिंता है। आप क्या चाहते हैं कि पूरी दुनिया से जो मुस्लिम आएं उन्हें नागरिकता दे दें। इसके बारे में बिल में साफ है कि हम तीन देशों के अल्पसंख्यक शरणार्थियों को ही नागरिकता देने जा रहे हैं।
2. बिल को लेकर फैलाई जा रही गलतफहमी, बिल से करोड़ो लोगों को उम्मीद है। उन्होंने कहा कि देश भर में बिल को लेकर गलतफहमी फैलाई जा रही है। पड़ोस के तीनों देशों में धार्मिक आधार पर अत्याचार किया गया है। सिर्फ उन पीड़ितों के सम्मान देने के लिए इस बिल को लेकर लाया जा रहा है।
3. भारत के अल्पसंख्यकों और मुस्लिमों को किसी को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। मेरी विपक्ष के सदस्यों को चुनौती है कि जो मुद्दे हैं, बहस में उठाएं। चले मत जाइएगा। मैं हर सवाल पर जवाब दूंगा। जिनका वीजा खत्म हो जाता है, उन्हें अवैध प्रवासी माना जाता है। हमने इन्हें बिल में शामिल किया है। धार्मिक आधार पर प्रताड़ितों को भी नागरिकता मिलेगी। 1955 के कानून की धारा 5 के तहत यह भी प्रावधान है कि पहले आए लोगों को उसी तारीख से नागरिक माना जाएगा, जिस दिन से वे आए हैं। उन्हें कोई कानूनी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा।
4.भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में इसे शामिल किया था। देश की जनता ने इसके आधार पर सरकार को चुना है। हमने चुनाव के पहले ही अपना इरादा देश के सामने रखा था। लोकतंत्र के अंदर जनादेश के बढ़कर कोई बात नहीं है। हमने लिखा था कि हम नागरिकता बिल में संशोधन करेंगे। पूर्वोत्तर के लोगों के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराएंगे। आज हम इन दोनों वादों को कानूनी जामा पहनाने जा रहे हैं।
5. जनजातियों, मिजोरम समेत पूर्वोत्तरी राज्यों पर बिल लागू नहीं होगा। 35 साल तक किसी को किसी को असम के लोगों की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत की चिंता ही नहीं हुई। असम की जनता को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हम आपके सभी हितों की रक्षा करेंगे। असम की समस्या की सच्चा समाधान करने का वक्त आ गया है। इसलिए हमने क्लॉज 60 कमेटी बनाई है। जितने जल्दी रिपोर्ट मिलेगी। सरकार निर्णय ले पाएगी।
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