अनुब्रत मंडल की रिहाई के लिए जज को मिली धमकी, बंगाल के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार

Published : Aug 25, 2022, 06:26 PM ISTUpdated : Aug 25, 2022, 06:32 PM IST
अनुब्रत मंडल की रिहाई के लिए जज को मिली धमकी, बंगाल के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार

सार

टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल (Anubrata Mondal) के जमानत के लिए जज को धमकी दिए जाने के मामले में पश्चिम बंगाल के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा है। वकीलों ने केस को किसी दूसरे राज्य के कोर्ट में ट्रांस्फर करने की गुहार लगाई है।

कोलकाता। पशु तस्करी के मामले में टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल (Anubrata Mondal) सीबीआई की हिरासत में हैं। अनुब्रत की रिहाई के लिए पश्चिम बंगाल के आसनसोल की सीबीआई कोर्ट के स्पेशल जज राजेश चक्रवर्ती को धमकी मिली है। इस मामले में पश्चिम बंगाल के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र भेजकर गुहार लगाई है।

बप्पा चटर्जी नाम के एक व्यक्ति ने पत्र भेजकर जज को धमकी दी है कि अगर उन्होंने अनुब्रत को जमानत नहीं दी तो उनके परिवार के लोगों को NDPS (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट) के मामले में फंसा दिया जाएगा। जज की दी गई धमकी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। 

 

 

 

 

वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को लिखी चिट्ठी
कोलकाता हाईकोर्ट और पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिला कोर्ट के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को इस संबंध में पत्र लिखा है। वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को घटना से अवगत कराया है और जज को मिली धमकी पर आक्रोश व्यक्त किया है। वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि इस मामले को पश्चिम बंगाल से बाहर के कोर्ट में ट्रांस्फर किया जाए ताकि जज को धमकी देकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश नहीं हो।

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वकीलों ने बताया है कि आरोपी अनुब्रत मंडल बिरभूम जिले का तृणमूल कांग्रेस का अध्यक्ष है। वह काफी रसूखदार व्यक्ति है। जिस तरह अनुब्रत मंडल के फायदे के लिए न्यायिक अधिकारियों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, यह चिंता की बात है। हमलोग कोलकाता हाईकोर्ट और अन्य जिला अदालतों के आम वकील हैं। हम न्यायपालिका पर जिस तरह हमले हो रहे हैं उससे बहुत अधिक चिंतित हैं। हमलोग इस तरह के हमलों का विरोध करते हैं। हमारी गुहार है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उचित कार्रवाई की जाए। इस केस को पश्चिम बंगाल से किसी दूसरे राज्य में ट्रांस्फर किया जाए। सुप्रीम कोर्ट भेजे गए पत्र पर 82 वकीलों के साइन हैं। वकीलों ने अपने पत्र की एक कॉपी केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू को भी भेजा है।

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