चारों बलात्कारियों को माफ कर दीजिए... इतना सुनते ही भड़क गईं निर्भया की मां, ऐसे निकाला गुस्सा

Published : Jan 18, 2020, 10:11 AM ISTUpdated : Jan 18, 2020, 10:16 AM IST
चारों बलात्कारियों को माफ कर दीजिए... इतना सुनते ही भड़क गईं निर्भया की मां, ऐसे निकाला गुस्सा

सार

निर्भया केस पर वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने के बयान पर आशा देवी ने कड़ी आपत्ति जताई है। इंदिरा जयसिंह ने कहा था कि दोषियों को माफ कर देना चाहिए। इसपर निर्भया की मां आशा देवी ने कहा, इंदिरा जयसिंह ने इस तरह का सुझाव देने की हिम्मत कैसे की। 

नई दिल्ली. निर्भया केस पर वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने के बयान पर आशा देवी ने कड़ी आपत्ति जताई है। इंदिरा जयसिंह ने कहा था कि दोषियों को माफ कर देना चाहिए। इसपर निर्भया की मां आशा देवी ने कहा, इंदिरा जयसिंह ने इस तरह का सुझाव देने की हिम्मत कैसे की। मैं सुप्रीम कोर्ट में कई बार उनसे मिल चुकी हूं। एक बार भी जब उन्होंने मेरी भलाई के लिए नहीं पूछा और आज वह दोषियों के लिए बोल री हैं। कुछ बलात्कारियों का समर्थन करके आजीविका कमाते हैं, इसलिए बलात्कार की घटनाएं बंद नहीं होती हैं।

"मैं निवेदन करती हूं, दोषियों को माफ कर दें"
वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने ट्वीट कर लिखा, "हम आशा देवी के दर्द को पूरी तरह से समझते हैं। मैं उनसे निवेदन करती हूं कि वह सोनिया गांधी को फॉलो करते हुए दोषियों को माफ कर दें।" जैसे उन्होंने (सोनिया) नलिनी सिंह को माफ कर दिया था। जयसिंह ने कहा, "उन्होंने (सोनिया) नलिनी के लिए मौत की सजा नहीं चाहती थीं। हम आपके साथ है पर मौत की सजा के खिलाफ।"

राजीव गांधी की हत्या की दोषी है नलिनी
1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हुई हत्या में नलिनी दोषी हैं। जिन्हें कोर्ट द्वारा मृत्युदंड सुनाया गया था। लेकिन 24 अप्रैल, 2000 को तमिलनाडु सरकार ने मौत की सज़ा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। नलिनी पिछले 27 साल से ज़्यादा वक्त से जेल में ही कैद हैं।

1 फरवरी 2020 फांसी की नई तारीख
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों के लिए डेथ वॉरंट में फांसी की नई तारीख 1 फरवरी 2020 की सुबह 6 बजे तय की है। इससे पहले कोर्ट ने 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी का वक्त तय किया था।

क्या है निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड

दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।

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