
Supreme court on Assam delimitation process: असम में परिसीमन प्रक्रिया को जारी रखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के परिसीमन प्रक्रिया को रोकने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने यह कहा कि वह इस बात की जांच करेगा कि इलेक्शन कमीशन इस प्रक्रिया को अपने दम पर अंजाम देने में सक्षम है या नहीं। परिसीमन एक संयुक्त प्रयास होता था जिसमें अदालतें भी शामिल होती थीं लेकिन सरकार ने 2008 में यह अधिकार आयोग को सौंप दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव एक्ट 1950 की धारा 80ए की संवैधानिक वैधानिकता को भी जांचने पर सहमति व्यक्त की है।
1976 में आखिरी बार किया गया था
असम की विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन आखिरी बार साल 1976 में हुआ था। 2005 में इस प्रक्रिया को दोहराने का प्रयास हुआ था। 2007 में पेश हुए चुनाव आयोग के मसौदे पर आई आपत्तियों पर चर्चा करने के लिए तीन दिवसीय मीटिंग इसी महीने के शुरूआत में किया गया था।
चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नौ विपक्षी दलों की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी नोटिस देकर जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई भारत के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय बेंच ने की। इस बेंच में जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल रहे।
पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव एक्ट 1950 की धारा 80ए की वैधानिकता की भी जांच
याचिका की सुनवाई करते हुए बेंच ने पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव एक्ट 1950 की धारा 80ए की संवैधानिक वैधता की जांच करने पर भी सहमति व्यक्त की। यह धारा, चुनाव आयोग को निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का कार्य करने का अधिकार देती है।
इन नौ दलों ने दी है चुनौती
असम में नौ विपक्षी दलों कांग्रेस, रायजोर दल, असम जातीय परिषद, सीपीआई (एम), सीपीआई, टीएमसी, एनसीपी, राजद और आंचलिक गण मोर्चा का प्रतिनिधित्व करने वाले दस नेताओं ने चल रही परिसीमन प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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