
नई दिल्ली। पिछले दिनों बेंगलुरु में 34 साल के अतुल सुभाष ने आत्महत्या कर ली थी। मरने से पहले उन्होंने 24 पेज का सुसाइड लेटर लिखा और वीडियो रिकॉर्ड किया। उन्होंने बताया कि पत्नी और उसके परिवार के लोगों की प्रताड़ना से तंग आकर जान दे रहे हैं।
बेंगलुरु पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की तो अतुल की पत्नी निकिता सिंघानिया फरार हो गई। पकड़े जाने से बचने के लिए वह रोज अपना लोकेशन बदल रही थी। वह सिर्फ WhatsApp पर कॉल करती थी और गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत पाने की कोशिश में जुटी थी, लेकिन उसके एक फोन कॉल ने बेंगलुरु पुलिस को गुरुग्राम स्थित उसके ठिकाने तक पहुंचा दिया।
बेंगलुरु पुलिस ने गुरुग्राम से निकिता को गिरफ्तार किया। उसकी मां निशा सिंघानिया और भाई अनुराग सिंघानिया को प्रयागराज से हिरासत में लिया गया। आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में चौथे आरोपी निकिता के चाचा सुशील सिंघानिया फरार हैं।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बेंगलुरु पुलिस द्वारा केस दर्ज किए जाने के बाद आरोपी उत्तर प्रदेश के जॉनपुर स्थित अपने घर में ताला लगाकर भाग निकले थे। बेंगलुरु पुलिस के अधिकारी जॉनपुर पहुंचे और सिंघानिया परिवार के घर पर नोटिस लगाया। उन्हें तीन दिन के अंदर पेश होने के लिए कहा गया।
निकिता और उसके परिवार के लोगों को पकड़ने के लिए बेंगलुरु पुलिस ने उसके करीबी संबंधियों की लिस्ट बनाई और सभी की निगरानी शुरू कर दी। निकिता सिर्फ व्हाट्सएप कॉल करती थी, जिससे उसे ट्रैक करने में परेशानी हो रही थी। इस बीच उसने अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी लगाई।
निकिता गुरुग्राम में एक पीजी आवास में छिपी हुई थी। उसकी मां और भाई उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के झूसी शहर में छिपे हुए थे। इस दौरान वे सभी अपने रिश्तेदारों से व्हाट्सएप कॉल के जरिए बात करते रहे। इस बीच निकिता ने गलती से अपने एक करीबी रिश्तेदार को फोन कॉल कर दिया। इस फोन कॉल की मदद से पुलिस ने निकिता के लोकेशन की जानकारी प्राप्त कर ली और गुरुग्राम के रेल विहार स्थित उस पीजी आवास तक पहुंच गई जहां निकिता छिपी हुई थी।
पुलिस ने निकिता को गिरफ्तार किया और उसे अपनी मां को फोन करने के लिए कहा। जब निशा सिंघानिया ने कॉल रिसीव किया तो पुलिस ने पता लगा लिया कि वह झूसी कस्बे में छिपी हुई है। पुलिस पहुंची और निशा को हिरासत में ले लिया।
पुलिस अधिकारी निकिता, उसकी मां और भाई को देर रात की फ्लाइट से बेंगलुरु ले गए। इस बात का ध्यान रखा गया कि विमान में सवार दूसरे लोग निकिता और उसके परिवार के लोगों को पहचान नहीं सकें। पुलिस अधिकारी चाहते थे कि टीम के बेंगलुरु पहुंचने से पहले उनके हिरासत में लिए जाने की खबर बाहर न आए। निकिता और उसके परिवार को बेंगलुरु ले जाए जाने की कोई भी खबर एयरपोर्ट या अन्य जगहों पर खतरनाक स्थिति पैदा कर सकती थी।
बेंगलुरु पहुंचने पर निकिता, उसकी मां निशा और भाई अनुराग को मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया। इसके बाद जेल भेजे जाने से पहले तड़के मजिस्ट्रेट के आवास पर ले जाया गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार निकिता ने पूछताछ के दौरान कहा है कि उसने कभी अतुल को परेशान नहीं किया। अतुल ही उसे परेशान कर रहा था। अगर उसे पैसे चाहिए होते तो वह घर छोड़कर नहीं जाती। अतुल ने अपने सुसाइड नोट और 80 मिनट के वीडियो में निकिता और उसके परिवार पर आरोप लगाया है कि उसने पैसे ऐंठने के लिए झूठे मामले दर्ज कराए हैं। मामले को निपटाने के लिए 3 करोड़ रुपए मांगे गए।
बता दें कि अतुल सुभाष पिछले सोमवार को बेंगलुरु स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे। उनके भाई विकास कुमार की शिकायत के बाद पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया। उनके परिवार ने यह भी कहा है कि वे बच्चे की कस्टडी चाहते हैं।
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