
धारवाड़। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) ने बांग्लादेश (Bangladesh) में हिंदुओं पर हुए हमले (attack on Hindus) के विरोध में प्रस्ताव पास किया है। संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल (अ. भा. का.मंडल) ने प्रस्ताव में कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हिंसक आक्रमणों पर कार्यकारी मंडल गहरा दुःख व्यक्त करता है और वहां के हिंदू अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रही क्रूर हिंसा और बांग्लादेश के व्यापक इस्लामीकरण के जेहादी संगठनों के षडयन्त्र की घोर निंदा करता है। यह प्रस्ताव संघ की कर्नाटक (Karnataka)के धारवाड़ (Dharwad) में हुई तीन दिवसीय मीटिंग के दूसरे दिन लाया गया। इस वार्षिक आयोजन में संघ प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) और सर कार्यवाहक दत्तात्रय होसबाले (Dattatreya Hoshebole) सहित देशभर से 350 संघ के प्रमुख लोग शामिल हैं।
यह है पूरा प्रस्ताव...
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल (अ. भा. का.मंडल) ने प्रस्ताव में कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हिंसक आक्रमणों पर अपना गहरा दुःख व्यक्त करता है और वहां के हिंदू अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रही क्रूर हिंसा और बांग्लादेश के व्यापक इस्लामीकरण के जेहादी संगठनों के षडयन्त्र की घोर निंदा करता है ।
प्रस्ताव में कहा गया कि बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदू समाज व हिंदू मंदिरों पर हिंसक आक्रमण का क्रम बिना रोकटोक चल रहा है। दुर्गा-पूजा के पवित्र पर्व काल में प्रारम्भ हुई इस साम्प्रदायिक हिंसा में अनेक निरपराध हिंदुओं की हत्या हुई ,सैंकड़ों लोग घायल हुए और हज़ारों परिवार बेघर हो गए। गत दो सप्ताह में ही हिंदू समाज की अनेक माता-बहनें अत्याचार की शिकार हुईं तथा मंदिरों व दुर्गा-पूजा पंडालों का विध्वंस हुआ।
निराधार झूठे समाचार प्रसारित कर साम्प्रदायिक उन्माद फैलानेवाले कुछ दोषियों की गिरफ़्तारी से यह स्पष्ट हुआ है कि कट्टरपंथी इस्लामिक शक्तियों का वर्तमान आक्रमण एक सुनियोजित षडयन्त्र था ।हिंदू समाज को लक्षित कर बार-बार हो रही हिंसा का वास्तविक उद्देश्य बांग्लादेश से हिंदू समाज का संपूर्ण निर्मूलन है, फलस्वरूप भारत विभाजन के समय से ही हिंदू समाज की जनसंख्या में निरंतर कमी आ रही है।
विभाजन के समय पूर्वी बंगाल में हिंदुओं की जनसंख्या जहाँ लगभग अठ्ठाईस प्रतिशत थी वह घटकर अब लगभग आठ प्रतिशत हो गई है। जमात-ए-इस्लाम ( बांग्लादेश) जैसे कट्टरपंथी इस्लामी समूहों द्वारा अत्याचारों के कारण विभाजन काल से और विशेषकर 1971 के युद्ध के समय बड़ी संख्या में हिंदू समाज को भारत में पलायन करना पडा। बांग्लादेश निर्माण के उपरान्त आज भी वही तत्व सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ रहे है जिसके कारण अल्पसंख्यक हिंदू समाज में असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई है।
अ. भा. का.मंडल का यह मत है कि बांग्लादेश सरकार अपने ही देश के अल्पसंख्यक समाज के ख़िलाफ़ बढ़ रही हिंसक घटनाओं को रोकने हेतू कठोर कदम उठाये। सरकार यह भी सुनिश्चित करे कि हिंदू विरोधी हिंसा के अपराधियों को कठोर दंड प्राप्त हो ताकि हिंदू समाज में ऐसा विश्वास उत्पन्न हो कि बांग्लादेश में वे अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए सम्मानपूर्वक सुरक्षित जीवन जी सकते हैं ।
अ. भा. का.मंडल मानवाधिकार के तथाकथित प्रहरी संगठनों और संयुक्त राष्ट्र संघ से संबंधित संस्थाओं के गहरे मौन पर चिंता व्यक्त करता है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आवाहन करता है कि वह इस हिंसा की निंदा करने के लिए आगे आए व बांग्लादेश के हिंदू ,बौद्ध व अन्य अल्पसंख्यक समाज के बचाव व सुरक्षा हेतु अपनी आवाज़ उठाए।
बांग्लादेश में दुर्गा पूजा पर हुआ था हिंदू मंदिरों पर हमला
बांग्लादेश के कोमिल्ला शहर में हिंदुओं के खिलाफ 13 अक्टूबर से शुरू हुई हिंसा 17 अक्टूबर तक पूरे बांग्लादेश में चलती रही थी। इस दौरान मंदिरों में तोड़फोड़ की गई और घरों को आग लगा दी गई थी। यह हिंसा दुर्गा पूजा पंडाल में कुरान रखकर भड़काई गई थी। साम्प्रदायिक हिंसा (communal violence) फैलाने वाले मुख्य आरोपी 35 वर्षीय इकबाल हुसैन को पुलिस ने पिछले दिनों पकड़ लिया था। बांग्लादेश में मंदिरों में तोड़फोड़ के विरोध में इस्कॉन संस्था ने 23 अक्टूबर को 150 देशों में प्रदर्शन किया था। अभी भी दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
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