बिहार के पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर को देश का सर्वोच्च भारत रत्न सम्मान, पीएम मोदी ने कहा-दलितों के मसीहा को मिला सम्मान

Published : Jan 23, 2024, 08:31 PM ISTUpdated : Jan 23, 2024, 08:49 PM IST
Karpuri thakur

सार

वह बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। बिहार में वह जननायक के रूप में लोकप्रिय हैं।

Bharat Ratna award: देश का सर्वोच्च सम्मान, भारत रत्न, कर्पूरी ठाकुर को दिया जाएगा। कर्पूरी ठाकुर, बिहार के सामाजिक न्याय आंदोलन के प्रणेता माने जाते हैं। वह बिहार के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और एक बार उप मुख्यमंत्री पद पर रहे। बिहार के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर को राज्य में पहली बार ओबीसी आरक्षण लागू करने का श्रेय जाता है। वह जननायक के रूप में लोकप्रिय हैं। श्री ठाकुर को यह सम्मान, उनकी जन्मशती वर्ष पर दिया जा रहा है। 24 जनवरी को उनकी जयंती है। 

क्या कहा पीएम मोदी ने कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न मिलने पर?

पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया है। उन्होंने कहा: मुझे खुशी है कि भारत सरकार ने सामाजिक न्याय के प्रतीक महान जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न से सम्मानित करने का निर्णय लिया है और वह भी ऐसे समय में जब हम उनकी जन्मशती मना रहे हैं। यह प्रतिष्ठित सम्मान हाशिये पर पड़े लोगों के लिए एक चैंपियन, समानता और सशक्तिकरण के समर्थक के रूप में उनके स्थायी प्रयासों का एक प्रमाण है। दलितों के उत्थान के लिए उनकी अटूट प्रतिबद्धता और उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने भारत के सामाजिक-राजनीतिक ताने-बाने पर एक अमिट छाप छोड़ी है। यह पुरस्कार न केवल उनके उल्लेखनीय योगदान का सम्मान करता है बल्कि हमें एक अधिक न्यायपूर्ण और न्यायसंगत समाज बनाने के उनके मिशन को जारी रखने के लिए भी प्रेरित करता है।

समस्तीपुर में हुआ था जन्म

कर्पूरी ठाकुर का जन्म बिहार के समस्तीपुर के पितौंझिया गांव के एक नाई परिवार में हुआ था। पिता का नाम गोकल ठाकुर और माता का नाम रामदुलारी देवी था। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में 26 महीने तक जेल में रहने वाले कर्पूरी ठाकुर ने आजादी के बाद शिक्षक के रूप में गांव के विद्यालय में अध्यापन किया। हालांकि, 1952 के विधानसभा चुनाव में वह ताजपुर से पहली बार सोशलिस्ट पार्टी से विधायक बने। टेल्को मजदूरों की मांग के लिए 1970 में वह 28 दिनों तक का आमरण अनशन कर सरकार को झुकने को मजबूर किए थे। राज्य के शिक्षामंत्री के रूप में कर्पूरी ठाकुर ने अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म कर हिंदी को लागू किया था। बिहार के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण काम किया। नितिश कुमार सरकार के पहले बिहार में संपूर्ण शराब बंदी को उन्होंने लागू किया था।

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