
नई दिल्ली: दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति के लिए मंगलवार को लोकसभा में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए शहर के भाजपा सांसदों ने कहा कि वह अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। लोकसभा में नियम 193 के तहत प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा के दौरान भाजपा सदस्यों ने कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह पड़ोसी राज्यों में पराली जलाया जाना नहीं, बल्कि यहां वाहनों से निकलने वाला धुआं और निर्माण गतिविधियां हैं। भाजपा सदस्य परवेश वर्मा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि वह ऐसे मास्क बांट रहे हैं जिसके बारे में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का दावा है कि ये प्रदूषण से नहीं बचा सकते।
BJP का आरोप- ऑड-ईवेन से नहीं पड़ा कुछ फर्क
परवेश वर्मा ने कहा, ‘‘दिल्ली सरकार ने 50 लाख ‘मास्क’ बांटे। लेकिन कोई निविदा जारी नहीं की गई। यह एक बहुत बड़ा घोटाला है।’’ वर्मा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली सरकार ने एक साल में विज्ञापन पर 600 करोड़ रूपए खर्च किए। वाहनों की ऑड-ईवेन योजना के विज्ञापन पर 70 करोड़ रुपए खर्च किए। लेकिन वह पिछले पांच साल में शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को ठीक नहीं कर पाई। इसलिए दिल्ली में निजी वाहनों की संख्या बढ़ी। उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री शहर में वायु प्रदूषण के लिये पराली जलाए जाने को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जबकि लोकसभा में आम आदमी पार्टी (आप) के एकमात्र सदस्य दिल्ली के मुख्यमंत्री के आरोपों पर बोलने के लिए यहां मौजूद नहीं हैं जो पंजाब से हैं।
मिलकर प्रयास करना होगा- गंभीर
वर्मा ने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की सराहना करते हुए कहा कि मौजूदा मुख्यमंत्री पांच साल में अपनी पहल से एक भी सड़क नहीं बना पाए। चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने कहा कि प्रदूषण के मामले पर आरोप-प्रत्यारोप और सस्ती राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर एक दूसरे के खिलाफ कीचड़ उछालने और राजनीति करने की बजाय मिलकर प्रयास करना होगा। गंभीर ने कहा कि इस मामले पर लघुकालिक नहीं, दीर्घकालिक कदम उठाने होंगे।
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए ताकि प्रदूषण के खिलाफ कदम उठाने में बहानेबाजी करने वाले राज्यों को दंडित किया जा सके।
(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)
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