
नई दिल्ली। ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चीन विदेशी कार निर्माताओं को अपने बाजार से धीरे-धीरे बाहर कर रहा है। इसपर केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा है कि भारत और चीन के बीच अंतर बेहद स्पष्ट है। विदेशी निवेशकों, कंपनियों और ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए निर्माण व इनोवेशन के लिए भारत भरोसेमंद पार्टनर है। भारत में निवेश और बौद्धिक संपदा (बौद्धिक संपदा) दोनों सुरक्षित हैं।
ग्लोबल कार निर्माताओं को धीरे-धीरे बाजार से निकाल रहा चीन
ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट दी है कि वोक्सवैगन और बीएमडब्ल्यू जैसी ग्लोबल कार निर्माता कंपनियों को चीन धीरे-धीरे अपने विशाल बाजार से बाहर कर रहा है। चीन में इन कंपनियों के कारों की बिक्री घट रही है।
चीनी बाजार में विदेशी कार निर्माताओं की हिस्सेदारी 2020 में 61% थी। 2022 की अंतिम तिमाही में यह घटकर 41% रह गई थी। 2023 की पहली छमाही में इसमें थोड़ी उछाल देखी गई, लेकिन साल के अंत तक यह 50 फीसदी से नीचे पहुंच सकती है। चीन में टोयोटा की बिक्री बढ़ी है, लेकिन निसान और होंडा के कारों की बिक्री तेजी से कम हुई है।
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इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ गई है मांग
चीन में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ गई है। बाजार तेजी से ईवीएस में ट्रांस्फर हो रहा है। चीन के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार का सिर्फ आठ फीसदी हिस्सा विदेशी कार कंपनियों के पास है। विदेशी कंपनियों की इलेक्ट्रिक कारें कीमत, रेंज और फीचर के मामले में चीनी कंपनियों के कारों से मुकाबला नहीं कर पा रहीं हैं। चीनी ऑटो बाजार के टॉप और बॉटम हिस्से में इलेक्ट्रिक कारें सबसे तेजी से जगह बना रहीं है। अगले चरण में मिडिल कैटेगिरी के कार बाजार में ईवी की पैठ बढ़ेगी। इससे पुराने कार निर्माताओं की बाजार हिस्सेदारी और कम हो सकती है।
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