
Income Tax collection in India: BlueKraft डिजिटल फाउंडेशन के सीईओ अखिलेश मिश्रा ने दावा किया हे कि पिछले दस साल में आम आदमी की आय में तीन गुना वृद्धि हुई है। कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन बढ़ा है। अखिलेश मिश्रा, शिवसेना यूबीटी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी के आरोपों का खंडन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन की एकजुटता से यह लग रहा है कि हर गुजरते दिन के साथ राहुल गांधी की तरह यह अधिक बेतुका होता जा रहा है।
अखिलेश मिश्रा ने कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार दावा किया है कि पिछले दशक में कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन में काफी वृद्धि हुई है। 2013-14 में 3.95 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 9.11 लाख करोड़ हो गया।
उन्होंने कहा कि भारत में टैक्स कलेक्शन में तेजी से वृद्धि वास्तव में देश में बढ़ती समृद्धि का संकेत है। बढ़ती समृद्धि के साथ ही अधिक लोग आयकर दायरे में आ रहे हैं। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, भारतीयों का औसत आय पिछले दशक में लगभग तीन गुना हो गई है, जो वित्त वर्ष 2014 में 3.1 लाख रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 21 में 11.6 लाख रुपये हो गई है।
अखिलेश मिश्रा ने दावा किया कि दुनिया भर में कॉरपोरेट टैक्स का पर्सनल टैक्स से काफी कम योगदान रहता है। केवल भारत में ही कॉरपोरेट टैक्स का अधिक योगदान रहता और व्यक्तिगत करों को कम लगाया जाता। ओईसीडी देशों में, कॉर्पोरेट कर औसतन कर राजस्व का केवल 9.8% है जबकि व्यक्तिगत करों का योगदान 23.9% है। अमेरिका में कॉर्पोरेट टैक्स, कर राजस्व का 5.1% है जबकि व्यक्तिगत कर 41.1% है।
उन्होंने कहा कि भारत में एक मिडिल क्लास के व्यक्ति का यूपीए के शासनकाल में साल 2014 में दो लाख की सालाना आय पर टैक्स नहीं देना था। लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद साल 2024 में मिडल क्लास के व्यक्ति को 7.5 लाख के सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारतीय मतदाताओं को यह पता है कि उनके टैक्स का यह सरकार ईमानदारी से उपयोग कर रही है औ कांग्रेस पार्टी के बिचौलियों और अन्य ठगों द्वारा इसे नहीं लूटा जाएगा। यही कारण है कि दाखिल किए गए आयकर रिटर्न की संख्या 2014 में लगभग 3.8 करोड़ से बढ़कर 2024 में लगभग 8.18 करोड़ हो गई है। लोगों को ईमानदार सरकार पर भरोसा है। लोग सजायाफ्ता लुटेरों के गठबंधन से नफरत करते हैं जिनका शीर्ष नेतृत्व या तो जेल में है या जमानत पर बाहर है। इसीलिए तो मोदी सरकार जीतती रहती है। और महाराष्ट्र में वंशवादी पार्टियों के सफाए के साथ INDI गठबंधन टूट गया है।
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